जेफ्री एपस्टीन केस में बड़े खुलासे: नई फाइलों में यौन शोषण, क्रिप्टो सौदे और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने
अमेरिका में जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ी नई जांच फाइलों में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए सौदे और कई बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए हैं। जानिए पूरे मामले की विस्तृत जानकारी।
जेफ्री एपस्टीन केस में बड़े खुलासे: नई फाइलों में यौन शोषण, क्रिप्टो सौदे और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने
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अमेरिका के कुख्यात फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में एक बार फिर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस) द्वारा जारी नई जांच फाइलों में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। इन दस्तावेजों ने न केवल एपस्टीन के अपराधों की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि उसके नेटवर्क और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मौत और दफनाने के आरोप ने बढ़ाई सनसनी

नई फाइलों में दावा किया गया है कि दो विदेशी महिलाओं की मौत यौन संबंधों के दौरान गला घोंटने से हुई थी। आरोप है कि इसके बाद एपस्टीन के एक कर्मचारी ने इन महिलाओं को न्यू मैक्सिको स्थित उसके फार्महाउस ‘जोरो रैंच’ में दफना दिया।

 

इस मामले में एपस्टीन की करीबी सहयोगी और पार्टनर गिस्लेन मैक्सवेल का नाम भी सामने आया है। मैक्सवेल पहले से ही नाबालिग लड़कियों को यौन शोषण के लिए तैयार करने के आरोप में सजा काट रही है।

 

‘ह्यूमन इन्क्यूबेटर’ बनाने का आरोप

एक और चौंकाने वाले खुलासे में एक नाबालिग लड़की ने दावा किया कि उसे “ह्यूमन इन्क्यूबेटर” यानी मानव अंडे सहेजने वाली मशीन की तरह इस्तेमाल किया गया। दस्तावेजों के मुताबिक, जोरो रैंच में कई लड़कियों को लंबे समय तक बंद रखा जाता था और उनसे जबरन गर्भधारण कराया जाता था।

 

बताया गया है कि बच्चों के जन्म के बाद उन्हें कहीं और भेज दिया जाता था और उनकी जानकारी तक नहीं दी जाती थी। इस दौरान एक पीड़िता ने मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या की कोशिश भी की थी।

 

क्रिप्टोकरेंसी से होते थे सौदे

जांच फाइलों में यह भी सामने आया है कि एपस्टीन से जुड़े कई आर्थिक लेनदेन पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम के बजाय बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किए जाते थे। इससे जांच एजेंसियों के लिए वित्तीय लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।

 

हालांकि, दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद यह भी सामने आया कि कुछ फाइलों में पीड़ितों की पहचान ठीक तरह से छिपाई नहीं गई थी। इसमें कई नाबालिग पीड़ितों की तस्वीरें और फोन नंबर भी सामने आ गए, जिसे लेकर न्याय विभाग को आलोचना का सामना करना पड़ा।

 

क्लोनिंग जैसे रिसर्च प्रोजेक्ट का भी जिक्र

फाइलों में रेडियो होस्ट और लेखक ब्रायन बिशप का नाम भी सामने आया है। बताया गया है कि बिशप ने एपस्टीन से ईमेल के जरिए ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी थी, जिसे उन्होंने क्लोनिंग से जुड़ा बताया था।

 

एपस्टीन ने इस प्रोजेक्ट में निवेश की सहमति जताई थी, लेकिन खुद उसका चेहरा बनने से इनकार किया था। एक अन्य ईमेल में एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा किसी को मारने की अनुमति मांगने जैसी बात भी सामने आई है, हालांकि इस पर एपस्टीन का जवाब स्पष्ट नहीं है।

 

गिस्लेन मैक्सवेल की भूमिका

जांच दस्तावेजों में बताया गया है कि 1994 से 1997 के बीच मैक्सवेल ने कई नाबालिग लड़कियों को एपस्टीन के जाल में फंसाया। वह पहले पीड़ितों से दोस्ती करती थी, उनके परिवार और जीवन के बारे में जानकारी जुटाती थी और फिर उन्हें शॉपिंग या घूमने के बहाने अपने करीब लाती थी।

 

इसके बाद वह पीड़ितों को यौन गतिविधियों को सामान्य दिखाने की कोशिश करती थी। कई मामलों में वह खुद मौजूद रहती थी और लड़कियों को एपस्टीन की मालिश करने के लिए मजबूर करती थी, जिसके दौरान यौन शोषण किया जाता था। पीड़ितों को पैसों का लालच देकर उन्हें मानसिक रूप से कर्जदार महसूस कराया जाता था ताकि वे विरोध न कर सकें।

 

लाखों दस्तावेजों में बड़े नामों का जिक्र

30 जनवरी को जारी किए गए दस्तावेजों में करीब 30 लाख पन्ने, 1.80 लाख तस्वीरें और 2 हजार वीडियो शामिल हैं। इन फाइलों में कई बड़े और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं।

 

इनमें टेक अरबपति इलॉन मस्क, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू, उद्योगपति रिचर्ड ब्रैनसन और कई अन्य हस्तियों के नाम शामिल हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि किसी दस्तावेज में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति ने कोई अपराध किया है।

 

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर

फाइलों में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन और कुछ अन्य लोगों की तस्वीरें और ईमेल भी सामने आए हैं। इन खुलासों के बाद ब्रिटेन की राजनीति में भी हलचल देखने को मिल रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। उन्होंने इस मामले से आहत लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।

 

एपस्टीन केस की शुरुआत कैसे हुई?

इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2005 में हुई थी, जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया था कि लड़की को मसाज के बहाने एपस्टीन के घर बुलाया गया और वहां उस पर यौन संबंध बनाने का दबाव डाला गया। जांच के दौरान करीब 50 नाबालिग लड़कियों ने ऐसे ही आरोप लगाए। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई।

 

रसूख के कारण मिली कम सजा

एपस्टीन के प्रभावशाली संपर्कों के कारण उसे शुरुआती मामलों में बेहद कम सजा मिली। साल 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की जेल हुई, जिसमें उसे बाहर जाकर काम करने की भी अनुमति थी। हालांकि साल 2019 में उसे सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमा शुरू होने से पहले ही जेल में उसकी मौत हो गई, जिसे आत्महत्या बताया गया।

 

कौन था जेफ्री एपस्टीन?

जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का अरबपति फाइनेंसर था। उसकी कई बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप लगे थे। उसकी पार्टनर गिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में दोषी ठहराया गया और वह फिलहाल 20 साल की सजा काट रही है।

 

मामला क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

एपस्टीन केस केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे पैसे, ताकत और प्रभाव के जरिए लंबे समय तक गंभीर अपराधों को छिपाया जा सकता है। नई फाइलों के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया और तेज होगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच हो सकेगी।


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