ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। भारत ने हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था, जिससे पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। अब पाकिस्तान ने भारत से इस संधि का सम्मान करने और इसे बहाल रखने की अपील की है।
पाकिस्तान ने भारत से की संधि बनाए रखने की मांग
मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान ने भारत के फैसले पर चिंता जाहिर की। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने भारत पर साझा जल संसाधनों को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार बहने वाली नदियों के पानी को लेकर किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई कई देशों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। मलिक ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता व्यवस्था का पालन करने की अपील की।
‘खतरनाक मिसाल’ बनने की चेतावनी
पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि अगर सिंधु जल संधि को स्थगित किया जाता है तो यह दुनिया के उन देशों के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है, जो नदियों के निचले हिस्से में स्थित हैं और साझा जल संसाधनों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पहले से ही दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में जल समझौतों को कमजोर करना वैश्विक स्तर पर समस्याएं बढ़ा सकता है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था। भारत का मानना था कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा संदेश देना जरूरी है। वहीं पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को खारिज करते हुए कहा था कि अगर समझौते के तहत पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोका गया तो उसे “युद्ध जैसी कार्रवाई” माना जाएगा।
क्या है सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह संधि सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे और उपयोग को नियंत्रित करती है। इस समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान दोनों को अलग-अलग नदियों के उपयोग के अधिकार दिए गए हैं। लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद यह संधि लागू रही है और इसे दुनिया के सबसे सफल जल समझौतों में गिना जाता है।
पाकिस्तान ने जलवायु संकट का भी उठाया मुद्दा
सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे का भी जिक्र किया। डॉ. मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर मिलकर काम करने की अपील भी की।
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