ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पाकिस्तान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। कई शहरों में प्रदर्शन, हिंसक झड़पें और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें अब तक 17 लोगों की मौत और 70 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह स्थिति दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर पड़ोसी देशों की आंतरिक शांति पर भी पड़ सकता है।
प्रदर्शन और हिंसा कैसे शुरू हुई?
अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले में खामेनेई की मौत की खबर जैसे ही पाकिस्तान पहुंची, वहां शिया समुदाय में गहरा आक्रोश फैल गया। पाकिस्तान की आबादी में शिया समुदाय करीब 20 प्रतिशत है, और यह समुदाय खामेनेई को धार्मिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।
लाहौर, कराची और इस्लामाबाद समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहे—कहीं आगजनी हुई, तो कहीं पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। कराची में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही, जहां प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचने की कोशिश करने लगे।
कराची में हिंसक झड़पें और मौतें
कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के गेट तोड़ने की कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन हालात बिगड़ गए। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा।
झड़प के दौरान गोलीबारी भी हुई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन ने घटना पर दुख जताया और कहा कि स्थिति नियंत्रण में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गिलगित-बाल्टिस्तान में आगजनी
सिर्फ बड़े शहर ही नहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में भी प्रदर्शन हुए। यहां प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों को निशाना बनाया और आग लगा दी।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अधिकारियों ने स्कार्दू जिले में कर्फ्यू लगा दिया। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना को भी हालात संभालने के लिए बुलाया गया।
सरकार की अपील – कानून अपने हाथ में न लें
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाना समस्या का समाधान नहीं है।
इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी हालात पर नजर रखने की बात कही है। दूतावास ने नागरिकों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
पाकिस्तान सरकार ने भी स्थिति को गंभीर माना है। गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर उन्हें हालात की जानकारी दी। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
सिंध प्रांत के सूचना मंत्री के प्रवक्ता ने झड़प में लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
यह घटनाक्रम दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहता। पड़ोसी देशों में भी इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पड़ता है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है। पाकिस्तान जैसे देशों में भी इसके कारण आंतरिक अशांति देखने को मिल रही है।
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