ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर सक्रिय कूटनीतिक पहल दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद बिन सुल्तान अल-नाह्यान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र में चल रही स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
हमलों की कड़ी निंदा
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी भी ऐसी घटना के खिलाफ है, जिसमें निर्दोष लोगों की जान जाती है या नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचता है। यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह हमेशा शांति और स्थिरता का समर्थन करता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस
दोनों नेताओं ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यह मार्ग वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत के लिए भी यह रास्ता ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा स्रोत है, इसलिए इसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शांति और स्थिरता पर सहमति
पीएम मोदी और यूएई राष्ट्रपति ने क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए मिलकर काम करने की बात कही। यह बातचीत दिखाती है कि भारत और यूएई के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध हैं और दोनों देश संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
पहले भी हो चुकी है बातचीत
यह पहली बार नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। इससे पहले 1 मार्च को भी पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से बात की थी और हमलों की निंदा करते हुए संवेदना व्यक्त की थी। लगातार संवाद से यह साफ होता है कि भारत इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है।
भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो 24 घंटे सक्रिय है। भारतीय दूतावास और मिशन लगातार लोगों के संपर्क में हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद देने के लिए तैयार हैं।
उड़ानों को लेकर अपडेट
यूएई से भारत आने-जाने वाली उड़ानों पर भी असर पड़ा है। कुछ समय के लिए हवाई क्षेत्र बंद किया गया था, लेकिन बाद में इसे फिर से खोल दिया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में उड़ानें चलाई जा रही हैं। हाल ही में करीब 55 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़कर लगभग 70 तक पहुंचने की उम्मीद है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत की भूमिका संतुलित और सक्रिय नजर आ रही है। एक तरफ भारत कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रहा है, तो दूसरी ओर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्षेत्र में हालात कैसे बदलते हैं और भारत की रणनीति किस तरह आगे बढ़ती है।
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