ट्रंप ने गाजा “बोर्ड ऑफ पीस” के लिए पाकिस्तान को भेजा न्योता, इजरायल की टेंशन बढ़ी?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” में पाकिस्तान को शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इस पहल के तहत गाजा के अस्थायी शासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण से जुड़े ढांचे पर काम होना है, जिससे इजरायल की चिंता बढ़ने की चर्चा है।​
ट्रंप ने गाजा “बोर्ड ऑफ पीस” के लिए पाकिस्तान को भेजा न्योता, इजरायल की टेंशन बढ़ी?
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गाजा में युद्ध और तबाही के बीच अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे वहां शासन कैसे चलेगा, सुरक्षा कैसे बनेगी और आम लोगों की जिंदगी कैसे पटरी पर आएगी। इसी बीच अमेरिका की तरफ से एक नया ढांचा सामने आया है, जिसे “बोर्ड ऑफ पीस” कहा जा रहा है। इस पहल का मकसद गाजा में अस्थायी व्यवस्था, क्षेत्रीय बातचीत और पुनर्निर्माण की दिशा तय करना बताया जा रहा है।

पाकिस्तान को न्योता: क्या कहा गया?

पाकिस्तान की तरफ से बयान में कहा गया है कि उनके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कोशिशों में शामिल रहेगा और फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक होना चाहिए। इस न्योते के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि गाजा पर बनने वाले नए सिस्टम में पाकिस्तान को जगह देने से कुछ देशों की बेचैनी बढ़ सकती है।

इजरायल की चिंता क्यों बढ़ रही है?

इस पूरे घटनाक्रम में इजरायल का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। खबरों में यह भी आया है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की इस योजना पर आपत्ति जताई है और कहा है कि यह इजरायल के साथ समन्वय में तैयार नहीं की गई। पाकिस्तान का इजरायल को लेकर रुख और गाजा के मुद्दे पर उसका स्टैंड पहले से ही सबके सामने रहा है, इसलिए इजरायल के लिए यह कदम सहज नहीं माना जा रहा।

बोर्ड ऑफ पीस” है क्या—और काम क्या होगा?

अमेरिकी योजना के मुताबिक “बोर्ड ऑफ पीस” का रोल रणनीतिक निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा होगा, ताकि गाजा संघर्ष से धीरे-धीरे विकास की तरफ बढ़ सके। यह बोर्ड गाजा में ट्रांजिशन के दौर में शासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण जैसी चीजों पर बड़ी तस्वीर तय करने वाला मंच माना जा रहा है। यानी सीधे शब्दों में, यह ऐसा सिस्टम बनाने की कोशिश है जिसमें गाजा का रोजमर्रा का काम चले, सुरक्षा व्यवस्था बने और दोबारा निर्माण के लिए पैसे व निवेश का रास्ता खुले।

शुरुआती पैनल में कौन-कौन?

व्हाइट हाउस की तरफ से एक शुरुआती “एग्जीक्यूटिव पैनल” का जिक्र भी आया है, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर जैसे नाम बताए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में ट्रंप के वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ और जेरड कुशनर का नाम भी इसी ढांचे से जोड़कर बताया गया है। इसके साथ तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान जैसे क्षेत्रीय चेहरे भी चर्चा में हैं, जिससे यह साफ है कि अमेरिका इस प्लान में कई देशों को जोड़ना चाहता है।

तुर्की और मिस्र का रुख

इस पहल में तुर्की और मिस्र को लेकर भी बातें सामने आई हैं। तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि उन्हें ट्रंप की ओर से पत्र मिला है, जबकि मिस्र की तरफ से यह बताया गया कि निमंत्रण की समीक्षा की जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि कुछ देश जल्द फैसला ले सकते हैं और कुछ देश सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहेंगे, क्योंकि गाजा का मुद्दा सिर्फ मानवीय नहीं, बल्कि सीधा राजनीति और सुरक्षा से जुड़ा है।

आगे की तस्वीर: सुरक्षा बल और उच्च प्रतिनिधि की योजना

इस प्रस्ताव में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स) तैनात करने और गाजा में बदलाव के दौरान शासन-सुरक्षा-पुनर्निर्माण के समन्वय के लिए एक “हाई रिप्रेजेंटेटिव” नियुक्त करने की योजना का भी जिक्र आया है। मतलब गाजा में केवल कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी एक तरह का अंतरराष्ट्रीय ढांचा खड़ा करने की तैयारी बताई जा रही है। हालांकि ऐसे किसी भी प्लान की असली परीक्षा यही होगी कि जमीन पर सुरक्षा कैसे संभले, और आम लोगों तक मदद कैसे पहुंचे।

पाकिस्तान की एंट्री से क्या बदल सकता है?

पाकिस्तान को न्योता मिलने के बाद यह सवाल उठता है कि क्या यह कदम क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव लाएगा। एक तरफ अमेरिका ज्यादा देशों को साथ लाकर गाजा पर व्यापक सहमति बनाना चाहता दिख रहा है, दूसरी तरफ इजरायल के लिए यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मसला बन सकता है। आने वाले दिनों में सबसे अहम बात यह रहेगी कि कौन-कौन देश इस बोर्ड का हिस्सा बनते हैं, और गाजा के लिए बनाई जा रही व्यवस्था वास्तव में किस दिशा में जाती है।

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