UNAMA की चेतावनी: ईरान-पाकिस्तान से लौटे लाखों अफगानों पर टूटा नया संकट!
UN रिपोर्ट के मुताबिक 2025 की शुरुआत से अब तक ईरान और पाकिस्तान ने 9.5 लाख अफगानों को निर्वासित किया है। महिलाओं-बच्चों की संख्या बढ़ी, संकट गहराया। गाजा की तरह यहां कोई आवाज नहीं।
UNAMA की चेतावनी: ईरान-पाकिस्तान से लौटे लाखों अफगानों पर टूटा नया संकट!
  • Category: विदेश

गाजा में मानवीय संकट की खबरें दुनियाभर में सुर्खियां बटोर रही हैं, लेकिन इसके पीछे एक और संकट धीरे-धीरे खतरनाक आकार ले रहा है, अफगान प्रवासियों का।


संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि साल 2025 की शुरुआत से 30 जून तक ईरान और पाकिस्तान ने मिलकर करीब 9.5 लाख अफगान नागरिकों को निर्वासित कर दिया है।


बड़ी संख्या में निकाले गए इन अफगानों को न केवल बेघर किया गया है, बल्कि उन्हें उनके ही जर्जर और अस्थिर देश में वापस धकेल दिया गया है।


ऐसे समय में जब अफगानिस्तान खुद गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संकट से गुजर रहा है, इन लोगों के लिए न तो छत है, न रोजगार और न ही स्वास्थ्य सेवाएं।


ईरान-पाकिस्तान से 9.5 लाख लोगों को निकाला


UNAMA के अनुसार, 1 जनवरी से 30 जून के बीच ईरान ने 7,41,000 और पाकिस्तान ने 2,08,000 अफगान शरणार्थियों को अपने देश से निकाल दिया। सिर्फ जून के महीने में ही ईरान ने 2.83 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर कर दिया।


यह निर्वासन बिना किसी पुख्ता पुनर्वास योजना के हुआ, जिससे अब अफगानिस्तान की ज़मीन पर एक और मानवीय आपदा मंडराने लगी है।


गाजा के लिए आंखें नम, अफगानों के लिए खामोशी


दुनियाभर में गाजा के हालात पर चिंताओं की झड़ी है, लेकिन अफगानिस्तान में लौट रहे इन लोगों की पीड़ा को कोई मंच नहीं मिल रहा।


अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफगान शरणार्थियों के ज़िक्र लगभग नगण्य हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मानवीय संवेदना सिर्फ लोकप्रियता के हिसाब से तय की जाती है?


क्यों मजबूर हैं अफगान लोग?


अफगानिस्तान दशकों से हिंसा, आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। जब 2021 में अमेरिका ने वहां से अपनी सेनाएं हटाई थीं और तालिबान ने सत्ता पर कब्जा किया, तभी से देश में जीवन स्तर तेजी से गिरा है।


लाखों लोगों ने ईरान और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में शरण ली, लेकिन अब उन्हें भी वहां से बेदखल किया जा रहा है।


बदले हुए हालात: महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित


UNAMA ने बताया कि पहले ज्यादातर निर्वासित लोग अविवाहित पुरुष होते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। 2025 में निकाले गए 60% से ज्यादा लोग महिलाएं और बच्चे हैं।


यह परिवर्तन न सिर्फ आंकड़ों में भारी बदलाव है, बल्कि इससे जुड़ी मानवीय चुनौतियां भी कहीं ज्यादा कठिन हैं। बच्चों की शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा और परिवार की आजीविका, हर पहलू पर संकट गहराता जा रहा है।


मेजबान देशों में भी बढ़ा सामाजिक तनाव


UNAMA की रिपोर्ट कहती है कि इतने बड़े स्तर पर अफगानों के वापस लौटने से सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि मेजबान देशों, ईरान और पाकिस्तान, में भी सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।


सीमित संसाधनों के चलते सामाजिक तनाव और बढ़ गया है। कुछ जगहों पर स्थानीय लोग भी इस बड़े बदलाव से नाराज नजर आए हैं, जिससे हालात और नाजुक हो गए हैं।


शेल्टर, रोजगार और दवाई तक नहीं


अफगानिस्तान लौटने वाले इन परिवारों के पास न घर है, न खाना, न इलाज का कोई प्रबंध।


UNAMA ने कहा है कि इन लोगों को फिर से जीवन शुरू करने के लिए तत्काल सहायता की जरूरत है, जिसमें शेल्टर, फूड, हेल्थकेयर और रोजगार जैसी चीजें शामिल हैं।


UN की अपील - “अब और देर मत कीजिए”


संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि अफगानिस्तान के अंदर इस नए उभरते मानवीय संकट को नजरअंदाज न करें।


रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह अफगानिस्तान के लिए विनाशकारी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव ला सकता है।


जहां एक ओर दुनिया गाजा के हालात पर प्रतिक्रिया दे रही है, वहीं अफगानिस्तान में संकट कहीं ज्यादा चुपचाप और भयानक तरीके से बढ़ रहा है।


10 लाख लोगों का पलायन कोई छोटा आंकड़ा नहीं है, यह एक संवेदनशील चेतावनी है, जिसे अगर अनसुना किया गया तो इसके प्रभाव न सिर्फ अफगानिस्तान पर बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।


आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।

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