ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है। इस तनाव का सबसे बड़ा संकेत तब मिला जब अमेरिकी युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन को ईरान के करीब तैनात किया गया। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इससे यह आशंका जताई जा रही है कि बड़े पैमाने पर संघर्ष या युद्ध की स्थिति बन सकती है।
दुनिया भर के विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर संघर्ष बढ़ गया, तो उसका असर सिर्फ मध्य पूर्व पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।
USS अब्राहम लिंकन — अमेरिका का सबसे शक्ति-शाली युद्धपोत
USS अब्राहम लिंकन एक एयरक्राफ्ट कैरियर है जिसे अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली जहाज माना जाता है। यह केवल एक जहाज नहीं है, बल्कि पूरा जंगी बेड़ा है जिसमें साथ में गाइडेड मिसाइल क्रूजर, विध्वंसक जहाज, सबमरीन और लड़ाकू विमान शामिल रहते हैं।
इस बेड़े की शक्ति इतनी अधिक है कि इसे दुश्मन पर जल, थल और हवा तीनों तरफ से प्रहार करने में सक्षम बताया जाता है। अमेरिका के पास मौजूद इस बेड़े की मौजूदगी का मतलब साफ़ है कि वॉशिंगटन ईरान पर दबाव बनाना चाहता है या अपनी ताकत दिखाना चाहता है।
महत्वपूर्ण युद्धक विमान और हथियार
अमेरिका के पॉलिटिकल और मिलिट्री रणनीतिकार ईरान को ठोस संदेश देने के लिए सिर्फ यूएसएस लिंकन पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। अमेरिकी वायुसेना के पास कुछ सबसे उन्नत लड़ाकू विमान और हथियार भी हैं:
इन सभी हथियारों को मिलाकर ही अमेरिका अपनी रणनीति बनाए हुए है।
ईरान का रुख और चेतावनी
ईरान ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसकी “उंगलियां ट्रिगर पर हैं”, मतलब किसी भी हमले की स्थिति में तुरंत जवाब देने के लिए तैयार हैं। ईरानी सामरिक कमान के बयान से साफ़ है कि तेहरान भी किसी भी तरह के सैन्य दबाव को मानने को तैयार नहीं है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि तनाव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह सकता। हालाँकि ईरान का इरादा साफ नहीं किया गया है कि वे किस सीमा तक जवाब देंगे, लेकिन अपने प्रतिद्वंद्वी पर सख्त प्रतिक्रिया देना उसकी प्राथमिकता बनी हुई है।
मध्य पूर्व की स्थिति और इजरायल का अलर्ट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व में सभी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर रख दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई फैलती है, तो इजरायल समेत आसपास के देशों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
इजरायल ने हाल ही में अपनी सुरक्षा तैयारियों को और कड़ा कर दिया है। इस्लामी जिहाद के खिलाफ लड़ाई के बीच, अगर अमेरिका सक्रिय भूमिका निभाता है, तो इजरायली वायुसेना को भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
संभावित संघर्ष का असर
अगर अमेरिका किसी तरह का सीधा हमला ईरान पर करता है, तो उसके प्रभाव बहुत गहरे और व्यापक होंगे:
दोनों देशों की यह टकराव केवल राजनीतिक या सैन्य मसला नहीं है, बल्कि इससे पड़ने वाले प्रभाव हर आम इंसान तक महसूस हो सकते हैं।
राजनीतिक और रणनीतिक पहलू
अमेरिका ईरान पर दबाव इसलिए भी बढ़ा रहा है, क्योंकि वह चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के विकास से पीछे हट जाए। हालाँकि बाद में कई रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान अभी तक परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, लेकिन अमेरिका की ओर से इसके संदेह को प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
ट्रम्प प्रशासन की नजर इस बात पर भी है कि अगर ईरान परमाणु कार्यक्रम में आगे बढ़ता है, तो उसके परिणाम पूरे मध्य पूर्व को असंतुलित कर सकते हैं।
दुनिया की प्रतिक्रिया
इस तनाव को लेकर दुनियाभर के देशों की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है। कुछ देश यह चाहते हैं कि युद्ध न हो और इस मुद्दे को कूटनीतिक बातचीत से सुलझाया जाए। वहीं कुछ राष्ट्र अमेरिका की कड़ी नीति को समर्थन भी दे रहे हैं। इससे साफ़ होता है कि इस टकराव के लिए सामूहिक वैश्विक राजनीति में भी असर पड़ेगा।
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