ईरान तनाव के बीच अमेरिकी नौसैनिकों की बढ़ी मुश्किलें, 8 महीने से समुद्र में तैनात 5,000 जवान
ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर अमेरिका ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती शुरू की। USS Gerald R. Ford पिछले जून से समुद्र में है और इसकी तैनाती 11 महीने तक बढ़ सकती है। तकनीकी दिक्कतों और नाविकों की नाराज़गी के बीच अमेरिकी शक्ति प्रदर्शन चर्चा में है।
ईरान तनाव के बीच अमेरिकी नौसैनिकों की बढ़ी मुश्किलें, 8 महीने से समुद्र में तैनात 5,000 जवान
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ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दी है। राष्ट्रपति Donald Trump की सख्त बयानबाज़ी के बाद हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा रही है। इस रणनीति के केंद्र में दुनिया का सबसे बड़ा और आधुनिक विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford है, जो पिछले कई महीनों से समुद्र में लगातार तैनात है।

 

जून से लगातार समुद्र में तैनात

USS जेराल्ड आर. फोर्ड पिछले साल जून से समुद्र में है। आमतौर पर शांति काल में किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत की तैनाती लगभग छह महीने की होती है, लेकिन इस बार मिशन की अवधि लगातार बढ़ाई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी तैनाती दूसरी बार बढ़ा दी है। अब यह समय 8 महीने से आगे बढ़कर 11 महीने तक पहुंच सकता है।

 

यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी नौसेना के इतिहास की सबसे लंबी लगातार तैनाती में से एक होगी। लंबे समय तक समुद्र में रहने से जहाज और उसके चालक दल दोनों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।

 

तकनीकी समस्याएं बनी बड़ी चुनौती

लगातार संचालन के कारण जहाज पर तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। 13 अरब डॉलर की लागत से बना यह अत्याधुनिक पोत कई उन्नत प्रणालियों से लैस है, लेकिन हाल के महीनों में प्लंबिंग और सीवेज सिस्टम बड़ी समस्या बन गए हैं।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार कई शौचालय काम नहीं कर रहे हैं। जहाज में वैक्यूम आधारित सिस्टम है, जिसमें एक जगह की खराबी पूरे सेक्शन को प्रभावित कर सकती है। सिस्टम में टी-शर्ट और लंबी रस्सी जैसी चीजें फंसी मिलने की भी जानकारी सामने आई है। नाविकों को दिन-रात इन समस्याओं को ठीक करने में जुटना पड़ रहा है। रखरखाव और मरम्मत का पूरा काम समुद्र में ही करना पड़ रहा है, जिससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

 

नाविकों में बढ़ती नाराज़गी

जहाज पर करीब 5,000 नाविक तैनात हैं, जिनमें से अधिकांश की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, सीमित संपर्क और लगातार तनावपूर्ण माहौल उनके लिए चुनौती बन गया है।

 

सुरक्षा कारणों से जहाज अक्सरघोस्ट मोडमें रहता है, यानी संचार सीमित कर दिया जाता है। ऐसे में नाविक अपने परिवार से नियमित रूप से बात भी नहीं कर पाते। कुछ नाविकों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे तैनाती खत्म होने के बाद नौसेना छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

 

मध्य पूर्व में बढ़ी अमेरिकी ताकत

अमेरिका ने फिलहाल मध्य पूर्व में एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें USS Abraham Lincoln भी शामिल है, जो एक और प्रमुख विमानवाहक पोत है। इसके अलावा नौ डेस्ट्रॉयर और तीन लिटोरल कॉम्बैट शिप भी क्षेत्र में मौजूद हैं।

 

आमतौर पर एक समय में मध्य पूर्व में दो अमेरिकी विमानवाहक पोतों की मौजूदगी दुर्लभ मानी जाती है। लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत कर दिया है।

 

रणनीतिक संदेश या युद्ध की तैयारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती सिर्फ सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है। अमेरिका यह दिखाना चाहता है कि वह क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

हालांकि, लंबी तैनाती और जहाज पर बढ़ती समस्याएं यह भी दिखाती हैं कि ऐसी सैन्य रणनीतियों की मानवीय और तकनीकी कीमत भी चुकानी पड़ती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बढ़ी हुई तैनाती तनाव कम करती है या क्षेत्र में हालात और जटिल बनाती है

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