ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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लोकसभा का माहौल उस समय अचानक बदल गया, जब बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक सांसद पर ई-सिगरेट पीते हुए देखा जाने का आरोप लगाया। यह मामला सिर्फ राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि देशभर में लागू ई-सिगरेट प्रतिबंध को लेकर एक गंभीर सवाल उठाने वाला था। ठाकुर ने सीधे लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से पूछा कि क्या संसद के भीतर ई-सिगरेट के इस्तेमाल की अनुमति है। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि किसी को भी ऐसा करने की अनुमति नहीं है। इसके बाद अनुराग ठाकुर ने मांग की कि इस प्रतिबंधित डिवाइस का इस्तेमाल करने वाले सांसद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
ई-सिगरेट: क्या है और कैसे काम करती है
ई-सिगरेट एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट है, जिसे सामान्य सिगरेट का विकल्प बताकर मार्केट में उतारा गया। यह डिवाइस बैटरी से चलती है और एक विशेष ई-लिक्विड को गर्म करके भाप में बदल देती है। उपयोगकर्ता इस भाप को धुएं की तरह फेफड़ों में खींचता है। ई-लिक्विड में निकोटीन, प्रोपिलीन ग्लाइकोल (PG), वेजिटेबल ग्लिसरीन (VG), फ्लेवरिंग एजेंट्स और करीब 70 से अधिक केमिकल्स शामिल होते हैं।
कई बार 'निकोटीन-फ्री' होने का दावा करने वाली ई-सिगरेट में भी छिपी हुई निकोटीन की मात्रा पाई जाती है, जो शरीर और विशेषकर युवाओं के मस्तिष्क के लिए हानिकारक है।
ई-सिगरेट में हीटिंग कॉइल होता है, जो बैटरी से ऑपरेट करता है। यह ई-लिक्विड को गर्म करके भाप में बदलता है। कुछ डिवाइस बटन दबाने पर और कुछ खींचने भर से काम करती हैं। ये पेन, पॉड और मॉड जैसे डिजाइनों में आती हैं और आधुनिक और हाई-टेक दिखती हैं, जिससे युवाओं में इसे सुरक्षित समझने की गलतफहमी पैदा होती है।
ई-सिगरेट के स्वास्थ्य जोखिम
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि ई-सिगरेट सुरक्षित नहीं है। अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के अध्ययन में पाया गया कि ई-सिगरेट में मौजूद प्रोपिलीन ग्लाइकोल और वेजिटेबल ग्लिसरीन फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और सूजन, कोशिका पर हमला, अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, भाप में एक्रोलीन जैसे खतरनाक केमिकल्स बनते हैं, जो फेफड़ों को जलाते हैं और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-सिगरेट का लगातार उपयोग दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को लगभग 30% तक बढ़ा देता है।
भारत में ई-सिगरेट पर कानून
भारत सरकार ने युवाओं में ई-सिगरेट के बढ़ते उपयोग और स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए 20 मई 2019 को पूरे देश में ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रतिबंध के तहत निर्माण, आयात, निर्यात, वितरण और बिक्री पूरी तरह गैरकानूनी है। पहली बार कानून तोड़ने पर एक लाख रुपये का जुर्माना और एक साल तक की जेल, और दोबारा पकड़े जाने पर पांच लाख रुपये का दंड और तीन साल तक कारावास की सजा हो सकती है।
लोकसभा में ई-सिगरेट का इस्तेमाल सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और कानूनी दृष्टि से भी गंभीर मामला है। अनुराग ठाकुर का यह आरोप न केवल सांसदों के व्यवहार पर सवाल उठाता है, बल्कि युवाओं और जनता के लिए सावधानी और जागरूकता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। भारत में सख्त कानून होने के बावजूद इसका इस्तेमाल करना गंभीर अपराध माना जाता है, और नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
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