ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हर साल 26 जनवरी को भारत गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और भावनात्मक उत्साह के साथ मनाता है। इसी दिन 1950 में हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक संप्रभु लोकतंत्र बन गया था। गणतंत्र दिवस की मुख्य आकर्षण होती है राजधानी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, पैरामिलिट्री बल और राज्यों की झांकियाँ शामिल होती हैं।
लेकिन इस भव्य परेड से पहले सेना की तैयारियाँ महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। सैनिकों को कड़ाई से ट्रेनिंग दी जाती है, उन्हें कई टेस्टों से गुजरना पड़ता है और उनके हथियारों तथा उपकरणों की सख्त जांच भी होती है — ताकि 26 जनवरी को परेड बिल्कुल त्रुटि‑रहित और गर्वपूर्ण रूप में दिखाई दे।
परेड की शुरुआत से पहले का कठिन सफर
26 जनवरी की परेड में शामिल होने वाले जवानों का चयन बहुत पहले से किया जाता है। करीब जुलाई महीने से ही ट्रेनिंग शुरू हो जाती है, और जवानों को रिहर्सल, मार्च‑पास्ट, फॉर्मेशन और युद्ध कला के अभ्यास में प्रशिक्षित किया जाता है।
बात केवल मार्च करना भर नहीं है। जवानों को अनुशासन, समय‑समय पर वास्तविक युद्ध स्थितियों का अभ्यास, सामूहिक तालमेल और साथ ही परेड के हर छोटे‑से‑छोटे चरण में प्राथमिकता देने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, परेड से पहले सैनिकों को सुबह के समय अलग‑अलग टेस्टों से भी गुजरना होता है, जिनमें फिटनेस, सामूहिक समन्वय और परेड के नियमों का अभ्यास शामिल है।
सिक्योरिटी और पहचान जांच: सुरक्षा की पहली पायदान
परेड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है सुरक्षा पुष्टि और पहचान जांच। हर जवान को कई स्तरों की जांच से गुजरना पड़ता है, जिसमें उनकी पहचान, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड की समीक्षा शामिल होती है। यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है ताकि परेड के दौरान किसी भी तरह की अप्रत्याशित घटना या जोखिम को रोका जा सके।
सैनिकों की ट्रेनिंग इतनी गंभीर होती है कि परेड वाले दिन से पहले ही वे करीब 600 घंटे का अभ्यास पूरा कर लेते हैं। रिहर्सल के दौरान ही कई टेस्ट दिए जाते हैं, ताकि अंतिम दिन पर कोई भूल‑चूक न हो।
हथियारों और उपकरणों की बारीकी से जांच
सिर्फ जवानों का प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि हथियारों और उपकरणों की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। परेड में शामिल किए जाने वाले टैंक, तोप, मिसाइल सिस्टम, बख्तरबंद वाहन और अन्य मशीनरी को विशेष तरीके से जांचा जाता है।
इस जांच में हर हथियार को सुरक्षित रूप से तैयार करना, गोला‑बारूद की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना, तथा यह देखना शामिल होता है कि कोई भी उपकरण लाइव गोलियों से लोड न हो। ताकि परेड के दौरान किसी भी तरह का हादसा न हो।
इतना ही नहीं, उपकरणों के मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल टेस्ट भी लिए जाते हैं ताकि वे परेड में सुचारु रूप से प्रदर्शित हो सकें। सेना और तकनीकी विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करते हैं कि तकनीकी साज‑सज्जा परेड के दौरान एक‑दूसरे के साथ तालमेल से काम करे।
रिहर्सल: कर्तव्य पथ पर अभ्यास का माहौल
परेड से कुछ सप्ताह पहले, राजधानी के कर्तव्य पथ पर फुल‑ड्रेस रिहर्सल शुरू हो जाती है। इसमें परेड के सभी दल, झांकियाँ, सैन्य तुकड़ियाँ और अन्य भागीदार उपस्थित होते हैं। यह अभ्यास इसलिए जरूरी है ताकि 26 जनवरी को हर टीम अपने क्रम, गति और सैन्य अनुशासन को सही तरीके से दिखा सके।
यह रिहर्सल सिर्फ एक प्रशिक्षण‑पथ नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ सैनिक अपने प्रदर्शन में त्रुटि‑रहितता लाने का प्रयास करते हैं। हजारों निरीक्षक, अधिकारी और ट्रेनिंग कमांडर इस रिहर्सल का निरीक्षण करते हैं और आवश्यक निर्देश देते हैं।
फिटनेस और अनुशासन: परेड की आत्मा
गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल जवान सिर्फ अपनी शक्ति ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और सामूहिक एकता भी दिखाते हैं। परेड में भाग लेने वाले जवानों को सुबह के पहले घंटे में उठकर अभ्यास करना होता है, ताकि वे थकान नहीं अनुभव करें। यह अनुशासन सेना की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सैनिकों के March Past की गति, फॉर्मेशन की सटीकता और उनके कदमों का त्याग भाव इस बात को दर्शाता है कि देशभक्ति उनके दिल में कितनी गहरी है।
आधुनिक हथियार और शक्ति प्रदर्शन
26 जनवरी 2026 की परेड में इस बार आधुनिक हथियार प्रणालियों और नई तकनीक के प्रदर्शन की भी उम्मीद है। इसमें न केवल पारंपरिक टैंक और तोपों का प्रदर्शन होगा, बल्कि अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम और सशस्त्र बलों की तकनीकी क्षमताएँ भी दिखेंगी।
यह परेड सिर्फ एक शान‑ओ‑शौकत का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि देश की ताकत, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आधुनिक रक्षा क्षमताओं का प्रतीक भी है।
विशेष अतिथि और दर्शकों का उत्साह
26 जनवरी की परेड सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं रहती; यह एक ऐसे राष्ट्रीय उत्सव की तरह होती है जहाँ लाखों भारतीय देशभक्ति का अनुभव करते हैं। इस साल करीब 10,000 विशेष अतिथि भी परेड देखने रक्त करेंगे, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के सम्मानित व्यक्ति शामिल होंगे।
यह उत्सव सिर्फ भारतियों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशी मेहमानों के लिए भी गौरव की बात होती है, क्योंकि वे दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर देखते हैं।
समापन: परेड की तैयारी में राष्ट्रीय एकता
गणतंत्र दिवस की परेड सिर्फ एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह देश की एकता, अनुशासन और सैन्य शक्ति का प्रतीक है। इसका आयोजन कई महीनों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, टेस्ट और उच्चस्तरीय तैयारियों के बाद होता है।
जब 26 जनवरी को परेड कर्तव्य पथ पर होती है, तो हर पहलू — जवानों की परफॉर्मेंस, हथियारों की सटीकता, झांकियों की प्रस्तुति और दर्शकों का जोश — यह सब मिलकर एक राष्ट्रीय पर्व को यादगार बनाता है।
इस तरह के आयोजन यह याद दिलाते हैं कि देश की सुरक्षा सिर्फ युद्धक क्षमता ही नहीं, बल्कि एकता, अनुशासन और गर्वपूर्ण इतिहास से भी जुड़ी होती है — जिसे हर भारतीय दिल में संजोकर रखता है।
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