ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
30 जनवरी हर साल भारत में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है, जिसे शहीद दिवस भी कहा जाता है। यह वही दिन है जब भारत ने अपने राष्ट्रपिता मोहनदास करमचन्द गांधी को खो दिया था। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था और 78 वर्ष की आयु में 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या हो गई थी।
महात्मा गांधी ने जीवन भर सत्य, अहिंसा और शांति का संदेश दिया और भारत को आज़ादी दिलाने के लिए अपने सरल जीवन, सत्याग्रह और असहयोग के आदर्श को अपनाया। उनके विचार आज भी दुनिया भर में मानवता के प्रतीक हैं।
बिड़ला हाउस से गांधी स्मृति तक — वह स्थल जहाँ इतिहास थमा
दिल्ली के तीस जनवरी मार्ग पर स्थित बिड़ला हाउस वह स्थान है जहाँ गांधी जी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन बिताए और वहीं पर उनकी हत्या हुई। यह घर मूल रूप से उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला का था, जिसे बाद में सरकार ने खरीदा और 1973 में गांधी स्मृति के नाम से जनता के लिए खोला गया। यह स्मृति स्थल अब केवल एक संग्रहालय नहीं है, बल्कि वह जगह है जहां देश की आज़ादी और विभाजन के समय की पीड़ा का इतिहास जीवंत रूप में महसूस होता है। यहां पर गांधी जी के जीवन से जुड़े कई दस्तावेज़, तस्वीरें और उनकी अंतिम यादें सुरक्षित रखी गई हैं।
बिड़ला हाउस का ऐतिहासिक सफर
बिड़ला हाउस का निर्माण 1928 में हुआ था और यह उस दौर में राष्ट्रीय नेताओं का ठिकाना भी रहा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई बैठकें इसी घर में होती थीं, जहां आज़ादी के मुद्दों, सांप्रदायिक सद्भाव और समाज की दिशा पर चर्चाएँ होती थीं। महात्मा गांधी 9 सितंबर 1947 से 30 जनवरी 1948 तक यहीं रहे। वे विभाजन के बाद देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इस दौरान वे शांति और भाईचारे का संदेश देने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे।
30 जनवरी 1948 — दुखभरी शाम
30 जनवरी 1948 की शाम बिरला हाउस के बगीचे में होने वाली नियमित प्रार्थना सभा के लिए गांधी जी जा रहे थे। जैसे ही वे धीरे‑धीरे आगे बढ़े, वहीं नाथूराम विनायक गोडसे उनके पास आए और नज़दीक से तीन गोलियाँ चलाईं। गांधी जी तीनों गोलियों से घायल हो गए और कुछ ही क्षणों में उन्होंने धरती पर लेटते हुए अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर दी।
उनके अंतिम शब्द “हे राम” बताए जाते हैं — यह शब्द आज भी मानवता और क्षमा की भावना को याद दिलाते हैं। उनकी हत्या के बाद देश भर में गहरा शोक और स्तब्धता फैल गई। वहीं दिल्ली के राज घाट पर उनके अंतिम संस्कार को यादगार रूप से मनाया गया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया था।
गोडसे और उसके इरादे
गोडसे वह व्यक्ति था जिसने इस हत्या को अंजाम दिया। वह हिंदुत्व विचारधारा से जुड़ा था और मानता था कि गांधी जी के अहिंसात्मक और उदार दृष्टिकोण ने भारतीय समाज में विभाजन को बढ़ावा दिया। हालांकि इतिहास बताता है कि यह विचार Gandhi के आदर्शों के बिल्कुल विपरीत थे। गोडसे के साथ कुछ और भी आरोपियों ने इस साजिश में हिस्सा लिया था। बाद में विशेष कोर्ट में सजा सुनाई गई जिसमें गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी की सजा दी गई और अन्य छह को आजीवन कारावास मिला।
गांधी स्मृति: सिर्फ़ संग्रहालय नहीं एक अनुभव
आज बिड़ला हाउस को गांधी स्मृति के नाम से जाना जाता है। यहां एक Eternal Gandhi Multimedia Museum भी स्थापित है, जिसमें गांधी जी के विचारों, संदेशों और उनके जीवन के प्रेरणादायक पक्ष को डिजिटल रूप में प्रदर्शित किया जाता है। स्मृति स्थल पर हर वर्ष 30 जनवरी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। लोग फूल चढ़ाते हैं, मौन रखते हैं और गांधी जी के सिद्धांतों को याद करते हैं। यह दिन महज शोक ही नहीं बल्कि समाज को गांधी के विचारों को आत्मसात करने का एक अवसर भी होता है।
बिड़ला हाउस की खास बातें
⦁ Gandhi जी ने अपने जीवन के आख़िरी महीनों में दिल्ली से शांति संदेश फैलाने का प्रयास किया था।
⦁ स्मृति स्थल पर उस मार्ग को भी चिन्हित किया गया है जहां से वे अंतिम प्रार्थना सभा की ओर गए थे।
⦁ संग्रहालय में गांधी जी के निजी सामान, उनके पत्र और तस्वीरें देखने को मिलती हैं, जो आज भी उनके विचारों को जीवित रखती हैं।
⦁ यह स्थान रोज़ाना लोगों के लिए खुला रहता है (सोमवार और राष्ट्रीय छुट्टी के कुछ अपवादों को छोड़कर)।
30 जनवरी: आज का संदेश
गांधी जी की पुण्यतिथि सिर्फ़ इतिहास की कहानी नहीं है, बल्कि आज के समाज के लिए भी एक सीख है। जब हम नफरत और हिंसा से अधिक विभाजन देखते हैं, तब यह हमें याद दिलाता है कि सत्य, अहिंसा और सम्मान का मार्ग ही सबसे सुदृढ़ और स्थायी होता है।
यह दिन हमें यह सोचने का मौका देता है कि क्या हम एक दूसरे की असहमति को नफरत में बदलने की जगह, बात‑चीत और समझ से निपट सकते हैं? गांधी जी के विचार आज भी इस सवाल का उत्तर ढूंढने में हमारी मदद करते हैं।
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