ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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आज के समय में सोना (Gold) और चांदी (Silver) दोनों ही कीमती धातुएं मानी जाती हैं और इन्हें निवेश व आर्थिक सुरक्षा के मजबूत विकल्प के रूप में देखा जाता है। सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, खासकर तब जब महँगाई बढ़ती है या दुनिया में किसी तरह का आर्थिक या राजनीतिक संकट होता है। हालांकि, अब चांदी सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रह गई है। वर्तमान समय में चांदी औद्योगिक, तकनीकी और निवेश की मांग के कारण भी खास महत्व हासिल कर रही है।
अमेरिका दुनिया में सबसे बड़ा सोने का भंडार रखने वाला देश है। उसके पास करीब 8,133 टन सोना मौजूद है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। लेकिन जब बात चांदी की खरीद की आती है, तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है और यहां अमेरिका नहीं बल्कि भारत आगे दिखाई देता है।
किस देश ने सबसे ज्यादा चांदी खरीदी?
2025 के आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया में सबसे बड़ा शारीरिक यानी फिजिकल चांदी खरीदार बनकर उभरा है। भारत ने साल 2025 में करीब 9.2 बिलियन डॉलर की रिफाइंड चांदी का आयात किया। यह आंकड़ा पिछले दस वर्षों की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत ज्यादा है, जो एक बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है।
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि भारत में चांदी की मांग सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक और निवेश के तौर पर भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अन्य देशों की तुलना में भारत की चांदी आयात की मात्रा इतनी अधिक है कि उसे दुनिया का सबसे बड़ा चांदी खरीदने वाला देश माना जा रहा है।
चांदी की बढ़ती मांग के पीछे की वजहें
चांदी की बढ़ती मांग के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे पहला कारण इसका औद्योगिक उपयोग है। आज के समय में चांदी केवल गहने बनाने के काम नहीं आती। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और कई तरह की औद्योगिक मशीनों में किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास के कारण चांदी की औद्योगिक खपत लगातार बढ़ रही है।
दूसरा बड़ा कारण परंपरागत मांग है। भारत समेत कई देशों में शादी और त्योहारों के दौरान चांदी की मांग हमेशा ज्यादा रहती है। विवाह और त्योहारों के मौसम में लोग चांदी के सिक्के, बर्तन और गहने खरीदते हैं, जिससे स्थानीय मांग बढ़ जाती है और इसका असर आयात पर भी पड़ता है।
तीसरा कारण चांदी की कीमतों में हो रहा बदलाव है। साल 2025 और 2026 के दौरान चांदी के दामों में तेजी देखने को मिली है। कीमतों में बढ़ोतरी के चलते निवेशकों का रुझान भी चांदी की तरफ बढ़ा है और लोग इसे निवेश के एक विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं।
इन सभी कारणों को मिलाकर देखा जाए तो भारत की चांदी खरीदारी वैश्विक बाजार पर गहरा प्रभाव डाल रही है।
दुनिया के अन्य प्रमुख चांदी खरीदार
हालांकि भारत सबसे बड़ा चांदी आयातक बन चुका है, लेकिन दुनिया के कुछ अन्य देश भी चांदी की खपत में अहम भूमिका निभाते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका चांदी के बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है, जहां इसका उपयोग खासतौर पर तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इसके अलावा जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया भी चांदी निवेश और खपत के मामले में महत्वपूर्ण देश माने जाते हैं।
हालांकि कुल आयात के आंकड़ों के आधार पर भारत 2025 में पहले स्थान पर रहा है, लेकिन अन्य देशों की औद्योगिक खपत और तकनीकी जरूरतें भी वैश्विक चांदी बाजार को प्रभावित कर रही हैं।
चांदी बनाम सोना: निवेश को लेकर सोच
अक्सर निवेशकों की यह धारणा होती है कि सोना ही सबसे सुरक्षित निवेश है। लेकिन मौजूदा समय में चांदी भी कई वजहों से निवेश के लिए आकर्षक विकल्प बन रही है।
सोने की तुलना में चांदी आमतौर पर सस्ती होती है, जिससे छोटे निवेशक भी इसमें आसानी से निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा चांदी की मांग सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक उपयोग की वजह से भी इसकी जरूरत बनी रहती है।
कभी-कभी चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसी कारण कुछ निवेशक इसे रणनीतिक निवेश विकल्प के तौर पर देखते हैं और अपने पोर्टफोलियो में इसे शामिल करते हैं। इन्हीं कारणों से आज निवेशक सोना और चांदी दोनों को अपने निवेश का हिस्सा बना रहे हैं।
चांदी की दुनिया में भारत की भूमिका
भारत ऐतिहासिक रूप से सोने का बड़ा बाजार रहा है, लेकिन अब उसने चांदी के आयात के मामले में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। भारत में चांदी की मांग अब सिर्फ परंपरागत गहनों तक सीमित नहीं रह गई है। औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के कारण भी इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से भारत को अब दुनिया के प्रमुख चांदी खरीदने वाले देशों में गिना जाने लगा है।
बाजार विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, बढ़ती महँगाई और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण चांदी का बाजार पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय हो गया है। वहीं सोना आज भी सुरक्षित निवेश का प्रतीक बना हुआ है, लेकिन चांदी की भूमिका अब औद्योगिक और तकनीकी निवेश के तौर पर भी मजबूत हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में चांदी की कीमत और मांग दोनों में और इजाफा देखने को मिल सकता है, खासकर तब जब तकनीकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा।
भविष्य की दिशा: आगे क्या होगा?
आने वाले महीनों और वर्षों में चांदी की कीमतों को कई अहम कारक प्रभावित करेंगे। इनमें वैश्विक आर्थिक नीतियां, औद्योगिक मांग में वृद्धि, उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति, साथ ही निवेशकों की सोच और भरोसा शामिल हैं।
अगर इन सभी कारकों में संतुलन बना रहता है, तो चांदी का बाजार मजबूत बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे चांदी में निवेश करते समय लंबी अवधि के नजरिए से सोचें और बाजार के रुझानों पर नजर बनाए रखें।
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