ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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महाराष्ट्र और दिल्ली में म्यूनिसिपल चुनाव चल रहे हैं। दिल्ली को अप्रैल में अपना नया मेयर मिलेगा, जबकि मुंबई में भी जल्द ही मेयर बदलने की उम्मीद है। इस दौरान, भारत के दो सबसे बड़े नगर निकायों, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (एमसीडी) की तुलना एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। दोनों ही निकायों को शक्तिशाली शहरी संस्थान माना जाता है, लेकिन इनके वित्तीय संसाधनों और मेयर की भूमिका में बहुत अंतर है।
बीएमसी और एमसीडी की वित्तीय ताकत
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को भारत और एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय माना जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बीएमसी का बजट ₹74,427 करोड़ है। यह बजट न केवल दिल्ली के म्युनिसिपल बजट से ज्यादा है, बल्कि कई राज्यों के वार्षिक बजट से भी बड़ा है।
इसके विपरीत, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली ने 2026-27 के लिए लगभग ₹16,530 करोड़ का बजट पेश किया है। इस प्रकार, वित्तीय दृष्टि से बीएमसी एमसीडी से लगभग चार गुना अधिक अमीर है।
क्या ज्यादा बजट का मतलब ज्यादा ताकत है?
हालांकि बीएमसी का बजट चार गुना ज्यादा है, इसका मतलब यह नहीं है कि मुंबई का मेयर ज्यादा शक्तिशाली है। वास्तव में, मुंबई और दिल्ली दोनों ही शहरों में मेयर के पास सीधी कार्यकारी शक्ति नहीं होती।
मुंबई में बीएमसी का असली कार्यकारी अधिकार म्युनिसिपल कमिश्नर के पास होता है। यह अधिकारी आमतौर पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ आईएएस ऑफिसर होता है। कमिश्नर के पास फाइनेंस, प्रशासन, परियोजना निष्पादन और स्टाफ के नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी होती है।
दिल्ली में मेयर और एमसीडी का पावर स्ट्रक्चर
दिल्ली में भी यही मॉडल लागू है। एमसीडी में सबसे शक्तिशाली अधिकारी म्युनिसिपल कमिश्नर होता है। उनके पास कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होते हैं। मेयर मुख्य रूप से राजनीतिक और औपचारिक प्रमुख होता है। वे कॉर्पोरेशन की बैठकें संचालित करते हैं और शहर का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिल्ली के मेयर की स्थिति और भी कमजोर होती है क्योंकि उनका कार्यकाल केवल एक वर्ष का होता है और कई फैसलों के लिए स्टैंडिंग कमेटी और अप्रूवल की लेयर होती है।
मेयर की भूमिका
दोनों शहरों में मेयर का मुख्य काम प्रशासनिक निर्णय लेना नहीं, बल्कि शहर का नेतृत्व और प्रतिनिधित्व करना होता है। मेयर की जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
इस प्रकार, मेयर मुख्य रूप से राजनीतिक चेहरा और प्रतीकात्मक प्रमुख होते हैं, जबकि असली प्रशासनिक शक्ति म्युनिसिपल कमिश्नर के पास होती है।
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