जानिए चीन के पास कितने परमाणु हथियार हैं और कैसे बना परमाणु शक्ति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण का आरोप लगाया था, जिसे चीन ने सिरे से खारिज कर दिया है। जानिए चीन के पास कितने परमाणु हथियार हैं, उसकी ‘नो फर्स्ट यूज़’ नीति क्या है और कैसे बना चीन दुनिया की प्रमुख परमाणु शक्ति।
जानिए चीन के पास कितने परमाणु हथियार हैं और कैसे बना परमाणु शक्ति
  • Category: सामान्य ज्ञान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया था कि चीन गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण कर रहा है। इस पर चीन ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह पारदर्शी और जिम्मेदार है।

 

हालांकि चीन ने ट्रंप के आरोपों को खारिज किया है, लेकिन यह भी सच है कि आज चीन दुनिया के उन देशों में शामिल है जिनके पास सबसे बड़ा परमाणु हथियारों का भंडार मौजूद है और वह तेजी से अपनी परमाणु क्षमता को विस्तार दे रहा है।

 

चीन के पास कितने परमाणु हथियार हैं?

 

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के पास करीब 600 परमाणु वारहेड्स मौजूद हैं। चीन के शस्त्रागार में भूमि, समुद्र और वायु—तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता शामिल है।

 

चीन के पास DF-5, DF-31/31A और DF-41 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें हैं जो हजारों किलोमीटर दूर तक मार कर सकती हैं। वहीं, Type 094 पनडुब्बियों में लगी JL-2 और JL-3 मिसाइलें समुद्र से परमाणु हमला करने में सक्षम हैं। इसके अलावा, H-6K/H-6N बॉम्बर्स हवा से परमाणु हमले की क्षमता बढ़ाते हैं।

 

‘नो फर्स्ट यूज़’ की नीति लेकिन बढ़ती शक्ति

 

चीन की आधिकारिक नीति हमेशा से “No First Use” (NFU) यानी पहले परमाणु हमला न करने की रही है। इसका अर्थ यह है कि चीन परमाणु हथियारों का प्रयोग केवल तब करेगा जब उस पर पहले हमला किया जाए।

 

लेकिन पिछले एक दशक में चीन ने जिस गति से अपने मिसाइल साइलो नेटवर्क, मोबाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म और परमाणु पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाई है, उससे यह संकेत जरूर मिलता है कि वह अब “न्यूनतम प्रतिरोध” से आगे बढ़कर “विश्वसनीय और टिकाऊ परमाणु शक्ति” बनने की दिशा में काम कर रहा है।

 

कैसे शुरू हुई चीन की परमाणु यात्रा

 

1949 में जनवादी गणराज्य चीन की स्थापना के बाद से ही राष्ट्रीय सुरक्षा उसकी शीर्ष प्राथमिकता रही। कोरियाई युद्ध (1950–53) और अमेरिका-सोवियत संघ के बीच बढ़ती तनातनी ने चीन को यह समझा दिया था कि परमाणु शक्ति के बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका प्रभाव सीमित रहेगा।

 

1950 के दशक के अंत में सोवियत संघ ने चीन को परमाणु तकनीक और अनुसंधान में मदद दी, लेकिन 1959-60 में दोनों देशों के मतभेद बढ़े और यह सहयोग खत्म हो गया। इसके बाद चीन ने “स्वदेशी मार्ग (Self-Reliance)” अपनाया और अपनी वैज्ञानिक संस्थाओं के सहयोग से खुद ही इस दिशा में काम शुरू किया।

 

16 अक्टूबर 1964 को चीन ने लोप नूर परीक्षण स्थल पर अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसका कोडनेम “596” था। इसके सिर्फ 32 महीने बाद, 17 जून 1967 को चीन ने सफलतापूर्वक हाइड्रोजन बम (H-बम) का परीक्षण किया, जिससे वह दुनिया की पांचवीं परमाणु शक्ति बन गया।

 

परमाणु कार्यक्रम के जनक: दंग जियासिएन और यू मिन

 

चीन के परमाणु कार्यक्रम की सफलता के पीछे कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा।

 

◘ दंग जियासिएन (Deng Jiaxian) को चीन के परमाणु बम का जनक माना जाता है।

◘ यू मिन (Yu Min) हाइड्रोजन बम के आर्किटेक्ट के रूप में प्रसिद्ध हैं।

◘ कियान सानकियांग (Qian Sanqiang) को “चीन का रदरफोर्ड” कहा जाता है जिन्होंने परमाणु विज्ञान की नींव रखी।

वहीं छियान श्वेसन (Qian Xuesen) ने चीन के रॉकेट और मिसाइल कार्यक्रम को दिशा दी।

 

इन वैज्ञानिकों की मेहनत से चीन आज दुनिया की अग्रणी परमाणु शक्तियों में शामिल है।

 

क्या चीन आज भी परमाणु परीक्षण करता है?

 

1996 में चीन ने Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty (CTBT) पर हस्ताक्षर किए और तब से उसने कोई आधिकारिक परमाणु परीक्षण नहीं किया है। हालांकि, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां यह दावा करती रही हैं कि चीन कंप्यूटर सिमुलेशन और सब-क्रिटिकल टेस्टिंग के जरिए अपने हथियारों को बेहतर बना रहा है।

 

लेकिन अब तक किसी भी सक्रिय या विस्फोटक परमाणु परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई है।

 

ट्रंप के दावे की सच्चाई क्या है?

 

अमेरिकी राजनीति में रक्षा और सुरक्षा हमेशा एक चुनावी मुद्दा रहे हैं। ट्रंप के बयान को भी इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार जरूर कर रहा है, परंतु किसी भी नए गुप्त परीक्षण के ठोस सबूत अभी तक सामने नहीं आए हैं।

 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ट्रंप का दावा राजनीतिक बयानबाज़ी ज्यादा लगता है, लेकिन यह सच भी है कि चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया को सतर्क कर दिया है।

 

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!

Related To this topic
Link copied to clipboard!

Watch Now

YouTube Video
Newsest | 22h ago
CJP Protest Ground Report | जंतर मंतर से संसद मार्च में क्या हुआ? Protesters से Exclusive बातचीत
YouTube Video
Newsest | 2d ago
ब्रिजेश सिंह की सच्ची कहानी: मुख्तार अंसारी का सबसे बड़ा दुश्मन | Purvanchal Mafia Don (Full Story)
YouTube Video
Newsest | 3d ago
नोएडा ममूरा आग हादसा | Fire Department, Authority और Safety System पर बड़े सवाल
YouTube Video
Newsest | 4d ago
राजा भैया की पूरी कहानी: पोटा से पत्नी के केस तक | कुंडा का अजेय बाहुबली!
YouTube Video
Newsest | 6d ago
क्या 3 अगस्त 2026 को जेल जाएंगे बृजभूषण? बाहुबल से पहलवानों के दंगल तक का पूरा सच!
YouTube Video
Newsest | 10d ago
डूब गया Noida Sector 19! मानसून में Smart City का ये हाल क्यों?
YouTube Video
Newsest | 14d ago
देश की शिक्षा व्यवस्था फेल? जंतर मंतर से Ground Report | #cjp #jantarmantar
YouTube Video
Newsest | 14d ago
स्मार्ट सिटी या डूबता शहर? Noida Sector 49 & Baraula ग्राउण्ड रिपोर्ट| #sector49 #Baraula
YouTube Video
Newsest | 18d ago
Ram Mandir Donation Theft: 10 दिनों में 70 चोरियां और चंपत राय का इस्तीफा!
YouTube Video
Newsest | 19d ago
क्या E20 पेट्रोल बर्बाद कर रहा है आपकी गाड़ी? Ethanol | E20 | Ground Report
YouTube Video
Newsest | 25d ago
Noida Sec 82 Bus Terminal: ₹158 करोड़ की बर्बादी या मास्टरप्लान? अब बनेगा Startups का नया हब!
YouTube Video
Newsest | 26d ago
OTT के दौर में खत्म हो रहा है Traditional Cinema? | Ravi Khanvilkar Exclusive । #NSD
YouTube Video
Newsest | 26d ago
72 Vs 40,000?! Karbala की ये कहानी सुनकर रूह कांप जाएगी! | Karbala Ka Waqia । #Muharram2026
YouTube Video
Newsest | 27d ago
कागज़ के नोट बंद? RBI का 6,373 करोड़ का मास्टरप्लान! | Plastic Money in India Explained
YouTube Video
Newsest | 28d ago
UP Politics Exploded: क्या SP के 26 सांसद छोड़ेंगे अखिलेश का साथ?