कंटेंट क्रिएटर बनना आसान नहीं, केवल 10% ही कमाते हैं असली पैसा
कंटेंट क्रिएटर बनना आसान नहीं, केवल 10% ही कमाते हैं असली पैसा
  • Category: सामान्य ज्ञान

आज के समय में कंटेंट क्रिएटर बनना खासकर युवा पीढ़ी के लिए बहुत आकर्षक बन गया है। जेनरेशन Z और युवा दिन-रात अपने मोबाइल पर वीडियो, रील्स और सोशल मीडिया पोस्ट बनाने में व्यस्त रहते हैं। सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो और वायरल पोस्ट देखकर यह लग सकता है कि हर कोई इससे लाखों रुपये कमा रहा है। लेकिन हकीकत इससे बहुत अलग है।


भारत में कंटेंट क्रिएटर्स की बढ़ती संख्या

भारत में लगभग 20 से 25 लाख लोग हर दिन मोबाइल स्क्रीन पर कंटेंट पोस्ट कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि कंटेंट क्रिएशन जल्दी और आसानी से पैसे कमाने का रास्ता है। लेकिन असलियत यह है कि केवल कुछ ही लोग ऐसे हैं जो वाकई में सफलता और अच्छी कमाई कर पाते हैं।


कंटेंट क्रिएटर इकोनॉमी की ताकत

भारत में कंटेंट क्रिएशन की दुनिया लगभग 15 साल पहले शुरू हुई थी। उस समय लोग इसे पेशे या कमाई का साधन मानने में हिचकिचाते थे। लोग कंटेंट क्रिएटर्स को बेरोजगार समझते थे।

आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मई 2025 में मुंबई में आयोजित वेव्स समिट में बताया गया कि भारत के डिजिटल क्रिएटर्स हर साल करीब 350 अरब डॉलर की कस्टमर स्पेंडिंग को प्रभावित कर रहे हैं। अगले पांच साल में यह आंकड़ा 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।

सरकार भी इस क्षेत्र को गंभीरता से ले रही है। मार्च 2025 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि क्रिएटर इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए 100 करोड़ डॉलर का निवेश किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहे छोटे-छोटे वीडियो और रील्स बड़े ब्रांड्स के लिए एक नई सेल्स फोर्स का काम कर रहे हैं।


असली कमाई कितने लोगों को होती है?

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार केवल 8-10 प्रतिशत क्रिएटर्स ही अपने कंटेंट से अच्छी कमाई कर पाते हैं। इसका मतलब है कि 20-25 लाख सक्रिय क्रिएटर्स में से केवल 2 से 2.5 लाख लोग ही पर्याप्त पैसा कमा पाते हैं। बाकी 90-92 प्रतिशत क्रिएटर्स या तो बहुत कम कमाते हैं या सोशल मीडिया उनकी मुख्य आमदनी का स्रोत नहीं है। यानी हर कोई वायरल होकर करोड़पति नहीं बन सकता।


कंटेंट क्रिएटर्स पैसे कैसे कमाते हैं?

सफल क्रिएटर्स के पास बड़ी ऑडियंस होती है, जिससे उनके पास कई कमाई के रास्ते खुलते हैं। वे ब्रांड पार्टनरशिप, स्पॉन्सरशिप, प्लेटफॉर्म एड्स, एफिलिएट मार्केटिंग और सब्सक्रिप्शन या प्रीमियम कंटेंट के जरिए पैसे कमाते हैं।


ब्रांड पार्टनरशिप में बड़े ब्रांड उनके वीडियो के माध्यम से प्रोडक्ट प्रमोट करते हैं। स्पॉन्सरशिप में कंपनियां सीधे पैसे देती हैं। प्लेटफॉर्म एड्स से वीडियो पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों के पैसे मिलते हैं। एफिलिएट मार्केटिंग में प्रोडक्ट का लिंक शेयर करके सेल्स पर कमीशन मिलता है। इसके अलावा कुछ क्रिएटर्स अपने खास कंटेंट के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल भी अपनाते हैं।


हालांकि सबसे ज्यादा पैसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही कमाते हैं। उदाहरण के लिए, यूट्यूब की भारत में आय 2024 में 14,300 करोड़ रुपये थी और फेसबुक (मेटा) का टर्नओवर भी हजारों करोड़ रुपये में था। इसका मतलब यह है कि चाहे कोई क्रिएटर करोड़पति बने, असली पैसा प्लेटफॉर्म के पास ही जाता है।


कंटेंट क्रिएशन का मानसिक दबाव

कंटेंट क्रिएशन केवल पैसा कमाने का तरीका नहीं है। इसमें भारी प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव भी होता है। क्रिएटर्स अक्सर अपने फॉलोअर्स और लाइक्स की संख्या देखकर खुद की तुलना दूसरों से करते हैं। कई बार कंटेंट वायरल न होने पर उनका मनोबल गिर जाता है। ऐसे में केवल टैलेंट होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि स्ट्रैटेजी और कड़ी मेहनत भी जरूरी होती है।


 

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