ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
सोने को हमेशा से सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। भारत में तो सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी हिस्सा है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, सोने की खरीदारी का खास महत्व होता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और बढ़ती महंगाई जैसे कारण बताए जा रहे हैं। इसी बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर इतिहास में सोने की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट कब आई थी? आइए जानते हैं उन बड़े गोल्ड क्रैश के बारे में, जिन्होंने दुनिया भर के निवेशकों को झटका दिया।
मार्च 2026: हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट
मार्च 2026 में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक बाजार में सिर्फ एक महीने के भीतर सोने के दाम करीब 19.5% तक टूट गए। भारत में भी इसका बड़ा असर देखने को मिला। जहां सोने का भाव करीब 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, वहीं गिरावट के बाद यह लगभग 1.31 लाख रुपये तक आ गया। विशेषज्ञों ने इसे 1970 के दशक के बाद सोने की सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में से एक बताया।
1980-1982: इतिहास का सबसे बड़ा गोल्ड क्रैश
सोने के इतिहास की सबसे चर्चित गिरावट 1980 से 1982 के बीच हुई थी। जनवरी 1980 में ईरान संकट, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के डर के कारण सोने की कीमत रिकॉर्ड 850 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी। अमेरिका के फेडरल रिजर्व चेयरमैन पॉल वोल्कर ने महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को लगभग 20% तक बढ़ा दिया। इस फैसले के बाद निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर डॉलर आधारित संपत्तियों और सरकारी बॉन्ड में निवेश करना शुरू कर दिया। जून 1982 तक सोने की कीमतों में करीब 58% की भारी गिरावट आ चुकी थी।
1983: एक दिन में बड़ा झटका
28 फरवरी 1983 को सोने के बाजार में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ एक ट्रेडिंग सेशन में सोने की कीमत करीब 9.6% तक टूट गई थी। उस समय इसे गोल्ड मार्केट के इतिहास की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावटों में गिना गया।
2013 का ‘गोल्ड फ्लैश क्रैश’
अप्रैल 2013 में सोने की कीमतों में दो दिनों के भीतर 13% से 15% तक की गिरावट आई थी। इसे “गोल्ड फ्लैश क्रैश” कहा गया। उस समय साइप्रस अपने कर्ज संकट से निपटने के लिए सोने का भंडार बेचने पर विचार कर रहा था। साथ ही अमेरिका की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलने लगे थे। इन वजहों से निवेशकों का भरोसा सोने से हटकर शेयर बाजार और अन्य संपत्तियों की ओर बढ़ गया।
2008 का आर्थिक संकट और सोने की गिरावट
2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली थी। 2008 से 2009 की शुरुआत तक कई महीनों में सोने की कीमत लगभग 29.5% तक गिर गई थी। हालांकि बाद में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने के साथ सोने में फिर तेजी लौट आई।
क्यों गिरते हैं सोने के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों पर कई वैश्विक कारकों का असर पड़ता है। इनमें ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, युद्ध, आर्थिक संकट और निवेशकों का भरोसा शामिल होता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशक सोने से दूरी बनाने लगते हैं। वहीं, संकट के समय सोने की मांग अचानक बढ़ जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
सोना भले ही सुरक्षित निवेश माना जाता हो, लेकिन इसका बाजार भी उतार-चढ़ाव से अछूता नहीं है। इतिहास बताता है कि कभी-कभी सोने में भी बड़ी गिरावट आ सकती है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ भावनाओं या अफवाहों के आधार पर नहीं, बल्कि लंबी अवधि की रणनीति और सही सलाह के साथ निवेश करना चाहिए।
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