ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत को आजादी मिले 75 साल से ज्यादा का समय हो चुका है। इस दौरान देश ने आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। लेकिन कुछ भारतीय कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के दौर में अपनी शुरुआत की थी और आज भी देश-दुनिया में मजबूत पहचान बनाए हुए हैं। इन कंपनियों ने सिर्फ कारोबार ही नहीं बढ़ाया, बल्कि भारत की आर्थिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। टाटा, डाबर, ओबेरॉय, महिंद्रा और ब्रिटानिया जैसे ब्रांड आज भी करोड़ों-अरबों रुपये का कारोबार कर रहे हैं और लोगों के भरोसे का हिस्सा बने हुए हैं।
टाटा ग्रुप: भारत का सबसे बड़ा कारोबारी नाम
भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित बिजनेस समूहों में टाटा ग्रुप का नाम सबसे ऊपर आता है। इसकी शुरुआत साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने की थी। आज टाटा ग्रुप स्टील, आईटी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, होटल और कंज्यूमर सेक्टर समेत कई क्षेत्रों में काम कर रहा है। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टीसीएस और एयर इंडिया जैसे बड़े ब्रांड इसी समूह का हिस्सा हैं। मुंबई का मशहूर ताज होटल भी टाटा ग्रुप की पहचान माना जाता है। आज यह समूह दुनिया के कई देशों में अपना कारोबार फैला चुका है।
डाबर: आयुर्वेद को घर-घर पहुंचाने वाला ब्रांड
डाबर की शुरुआत साल 1884 में डॉक्टर एसके बर्मन ने कोलकाता में की थी। शुरुआत में वे आयुर्वेदिक इलाज करते थे और जड़ी-बूटियों से दवाइयां तैयार करते थे। धीरे-धीरे उनके उत्पाद लोगों के बीच लोकप्रिय होते गए और डाबर आयुर्वेदिक उत्पादों का बड़ा नाम बन गया। कंपनी का सबसे लोकप्रिय उत्पाद च्यवनप्राश आज भी करोड़ों भारतीयों के घरों में इस्तेमाल होता है। आज डाबर हेल्थ केयर और आयुर्वेदिक बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाली बड़ी कंपनी बन चुकी है।
ओबेरॉय होटल: 25 रुपये से शुरू हुआ सफर
ओबेरॉय होटल ग्रुप की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल मानी जाती है। इसकी शुरुआत मनमोहन सिंह ओबेरॉय ने की थी। बताया जाता है कि वे सिर्फ 25 रुपये लेकर शिमला पहुंचे थे, जहां उन्हें होटल सिसिल में क्लर्क की नौकरी मिली। होटल इंडस्ट्री की बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने साल 1935 में इस होटल को खरीद लिया। यहीं से ओबेरॉय ग्रुप की नींव पड़ी और धीरे-धीरे यह भारत की सबसे बड़ी लग्जरी होटल चेन में शामिल हो गया। आज ओबेरॉय होटल्स का कारोबार भारत के अलावा यूएई, सऊदी अरब, इंडोनेशिया और मिस्र जैसे देशों तक फैला हुआ है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा: ट्रैक्टर से SUV तक का सफर
महिंद्रा एंड महिंद्रा की शुरुआत 1945 में हुई थी। शुरुआत में इसका नाम ‘महिंद्रा एंड मोहम्मद’ था, जिसे जगदीश चंद्र महिंद्रा, कैलाश चंद्र महिंद्रा और मलिक गुलाम मोहम्मद ने मिलकर शुरू किया था। देश विभाजन के बाद मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान चले गए, जिसके बाद कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा कर दिया गया। आज कंपनी ट्रैक्टर, SUV और कमर्शियल व्हीकल्स के क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है।
ब्रिटानिया: छोटी दुकान से बना बड़ा फूड ब्रांड
ब्रिटानिया की शुरुआत 1892 में कोलकाता में वाडिया परिवार ने की थी। शुरुआत एक छोटी दुकान से हुई, लेकिन धीरे-धीरे कंपनी ने फूड इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बना ली। आज ब्रिटानिया बिस्कुट, ब्रेड और डेयरी प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में देश का बड़ा नाम है। कंपनी का कारोबार भारत के अलावा कई विदेशी बाजारों तक फैल चुका है।
आज भी कायम है इन ब्रांड्स का भरोसा
इन कंपनियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि समय बदलने के बावजूद इन्होंने खुद को लगातार अपडेट किया। नई तकनीक, बदलती जरूरतों और आधुनिक बाजार के हिसाब से खुद को ढालकर ये ब्रांड आज भी लोगों के भरोसे का प्रतीक बने हुए हैं।
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