ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
एक समय था जब घरेलू गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ देश के अधिकांश उपभोक्ताओं को मिलता था। सिलेंडर खरीदने के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में पहुंच जाती थी, जिससे रसोई का खर्च काफी कम हो जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने LPG सब्सिडी व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं। अब सब्सिडी का लाभ मुख्य रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों तक सीमित हो गया है। आइए जानते हैं कि 2014 से 2026 तक गैस सब्सिडी व्यवस्था में क्या-क्या बदलाव हुए और वर्तमान में लोगों को कितना फायदा मिल रहा है।
2014-15 में लागू हुई PAHAL योजना
केंद्र सरकार ने LPG सब्सिडी को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए PAHAL (Direct Benefit Transfer for LPG) योजना लागू की। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर बाजार मूल्य पर दिया जाने लगा और सब्सिडी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाने लगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों को खत्म करना तथा वास्तविक लाभार्थियों तक सब्सिडी पहुंचाना था।
PAHAL योजना के अंतर्गत दो माध्यमों से सब्सिडी ट्रांसफर की जाती है:
1. Aadhaar Transfer Compliant (ATC) Mode
2. Bank Transfer Compliant (BTC) Mode
BTC मोड में आधार लिंक न होने पर भी रजिस्टर्ड बैंक खाते में सब्सिडी भेजी जा सकती है।
30 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2024 तक 30.19 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ता PAHAL योजना से जुड़े हुए थे। सरकार का दावा है कि इस योजना के जरिए करोड़ों फर्जी कनेक्शन समाप्त किए गए और सब्सिडी का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
'Give It Up' अभियान ने बदली तस्वीर
साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'Give It Up' अभियान शुरू किया। इसके तहत आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से स्वेच्छा से LPG सब्सिडी छोड़ने की अपील की गई। इस अभियान को व्यापक समर्थन मिला और पहले ही वर्ष लगभग 1 करोड़ लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी। इससे बचाई गई राशि गरीब परिवारों तक LPG कनेक्शन पहुंचाने में उपयोग की गई।
2016 में शुरू हुई उज्ज्वला योजना
मई 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की गई। इस योजना का उद्देश्य गरीब और ग्रामीण परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। योजना के तहत पात्र परिवारों की महिलाओं को 14.2 किलोग्राम एलपीजी कनेक्शन पर लगभग 2,200 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। वहीं, 5 किलोग्राम एलपीजी कनेक्शन लेने पर लगभग 1,300 रुपये तक की सहायता दी गई।
इसके अलावा, लाभार्थियों को गैस चूल्हा खरीदने के लिए ब्याज मुक्त ऋण (इंटरेस्ट-फ्री लोन) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के एलपीजी का उपयोग शुरू कर सकें। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना और पारंपरिक चूल्हों से होने वाले धुएं के दुष्प्रभावों से महिलाओं एवं बच्चों को बचाना था।
उज्ज्वला योजना के तीन चरण
पहला चरण (2016-2019)
सरकार ने 8 करोड़ गरीब परिवारों को LPG कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा था, जिसे सितंबर 2019 तक पूरा कर लिया गया।
दूसरा चरण - उज्ज्वला 2.0 (2021-2022)
इस चरण में 1.6 करोड़ अतिरिक्त कनेक्शन जारी किए गए। प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों को विशेष लाभ दिया गया।
तीसरा चरण (2023-2026)
सरकार ने 75 लाख नए कनेक्शन स्वीकृत किए। जुलाई 2024 तक यह लक्ष्य भी पूरा कर लिया गया। जनवरी 2025 तक देशभर में 10.33 करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शन जारी किए जा चुके थे।
अब कितनी मिलती है सब्सिडी?
मई 2022 में सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रति 14.2 किलो सिलेंडर पर ₹200 की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर ₹300 प्रति सिलेंडर कर दिया गया। हालांकि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में समय-समय पर बदलाव किया गया है। शुरुआत में 12 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती थी। बाद में यह संख्या घटाई गई और अब उज्ज्वला लाभार्थियों को सीमित संख्या में ही सब्सिडी का लाभ मिलता है।
दिल्ली में कितना पड़ता है सिलेंडर?
उदाहरण के तौर पर यदि दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है और उस पर ₹300 की सब्सिडी मिलती है, तो उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को प्रभावी रूप से केवल ₹642 का भुगतान करना पड़ता है। सरकारी अनुमानों के अनुसार एक सिलेंडर की कुल आपूर्ति लागत लगभग ₹1,600 तक होती है। इस हिसाब से लाभार्थियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब ₹1,000 तक का फायदा मिल रहा है।
आम उपभोक्ताओं को क्यों नहीं मिल रही सब्सिडी?
पिछले कुछ वर्षों में सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG सब्सिडी लगभग समाप्त हो चुकी है। सरकार अब लक्षित सब्सिडी मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सहायता दी जा रही है।
पिछले एक दशक में LPG सब्सिडी व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले लगभग सभी उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती थी, वहीं अब इसका लाभ मुख्य रूप से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के पात्र परिवारों तक सीमित है। सरकार का उद्देश्य सब्सिडी को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना और सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी बनाना है। ऐसे में उज्ज्वला योजना आज भी करोड़ों गरीब परिवारों के लिए रसोई का खर्च कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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