ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आज भी लोगों के लिए एक अहम विषय बनी हुई हैं। अलग‑अलग राज्यों में ईंधन की कीमतों में फर्क का कारण राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाला वैट (VAT) और स्थानीय कर है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग‑अलग होते हैं। इसी वजह से कुछ राज्यों में पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है तो कुछ जगहों पर यह ₹100 से नीचे है।
कहां है सबसे महंगा पेट्रोल?
देश में पेट्रोल की कीमतें यदि देखा जाएँ तो आंध्र प्रदेश में यह सबसे ज़्यादा है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग ₹109.87 है, जो कि अधिकांश राज्यों से अधिक है। इसके अलावा केरल और तेलंगाना में भी पेट्रोल की कीमत ₹107 के आसपास है। बड़े शहरों में भी यह माइलेज के अनुसार महंगा बिक रहा है जैसे कि भोपाल (मध्य प्रदेश) में लगभग ₹106.45 प्रति लीटर, पटना (बिहार) में करीब ₹105.16 और जयपुर (राजस्थान) में लगभग ₹104.86 प्रति लीटर है। इस तरह दक्षिण भारत और कुछ मध्य तथा पूर्वी राज्यों में पेट्रोल की कीमतें ₹100 से ऊपर बनी हुई हैं।
इन माहंगाई दरों के पीछे मुख्य कारण राज्य सरकारों द्वारा ज्यादा वैट और कर लगाना है, जिससे ईंधन का कुल मूल्य बढ़ जाता है। केंद्र सरकार की तरफ से पेट्रोल और डीजल पर जो एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है, वह सभी राज्यों में समान रहती है, लेकिन वैट में फर्क के कारण राज्यों में विभिन्न कीमतें देखने को मिलती हैं।
कहां है सबसे सस्ता पेट्रोल‑डीजल?
जहां पेट्रोल कुछ जगह महंगा है, वहीं कुछ स्थानों पर यह काफी सस्ता भी मिल रहा है। सबसे सस्ता पेट्रोल और डीजल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मिलता है, जहां पेट्रोल की कीमत लगभग ₹82 प्रति लीटर है और डीजल लगभग ₹78 प्रति लीटर बिक रहा है।
इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी ईंधन सस्ती दर पर उपलब्ध है:
• दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹94.76 और डीजल ₹87.66 प्रति लीटर है।
• पणजी (गोवा) में पेट्रोल ₹95.19 और डीजल ₹87.76 प्रति लीटर है।
• गुवाहाटी (असम) में पेट्रोल ₹96.12 प्रति लीटर है।
इन जगहों पर वैट और स्थानीय कर कम होने की वजह से कीमतें अन्य राज्यों की तुलना में कम बनी हुई हैं।
पेट्रोल‑डीजल की कीमतों में अंतर क्यों होता है?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल एक राष्ट्रीय दर से तय नहीं होतीं। इसके पीछे कई कारण हैं:
• स्टेट वैट (State VAT): राज्य सरकारें अपने खजाने को मजबूत करने के लिए अलग‑अलग वैट दरें लगाती हैं, जो कीमतों में बड़ा फर्क डालता है।
• स्थानीय कर और शुल्क: कुछ राज्यों में अतिरिक्त कर या शुल्क जुड़ जाता है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं।
• परिवहन लागत: रिफाइनरी से डीलर तक पहुँचने में लगने वाली लागत भी ईंधन की खुदरा कीमत को प्रभावित करती है।
• वैश्विक कच्चे तेल की दर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने या घटने पर भी डीलर रेट प्रभावित होते हैं।
प्रभाव आम आदमी पर
पेट्रोल‑डीजल की कीमतें बढ़ें तो सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर रोजमर्रा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी होता है। इसका असर महंगाई (Inflation) पर भी देखी जा सकती है, क्योंकि अधिक परिवहन लागत का असर वस्तुओं की डिलीवरी और सस्ता माल उपलब्ध कराने की क्षमता पर पड़ता है।
क्या स्थिति सस्ती हो सकती है?
हालांकि पेट्रोल‑डीजल की कीमतें कई महीनों से ₹100 के ऊपर बनी हुई हैं, राज्यों में वैट कटौती या करों में बदलाव के जरिए सरकारें कुछ राहत दे सकती हैं। लेकिन इससे पहले कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दर, परिवहन लागत और कर‑व्यवस्था पर ध्यान देना ज़रूरी है।
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