ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे के बाद एक नाम बार-बार सामने आ रहा है, रमेश विश्वास कुमार।
जहां इस भयावो हादसे में 241 लोगों की जान चली गई, वहीं केवल रमेश ही थे जो मलबे से निकलकर चलने की हालत में थे।
वो सीट नंबर 11A पर बैठे थे, और अब इसी सीट को लेकर चर्चा तेज हो गई है, कि क्या वाकई प्लेन में कुछ सीटें दूसरों से ज्यादा सुरक्षित होती हैं?
टेकऑफ के 30 सेकेंड में क्रैश, लाशों के बीच दिखे रमेश
रमेश ने बताया कि टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड के भीतर जोरदार धमाका हुआ और जब उन्हें होश आया तो उनके चारों ओर लाशें बिछी थीं।
वो खुद मलबे से निकले और फिर किसी ने उन्हें उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाया। 40 वर्षीय रमेश ब्रिटिश नागरिक हैं और उनका भाई भी उसी फ्लाइट में था।
38 साल पहले भी हुआ था ऐसा चमत्कार
1987 में अमेरिका के डेट्रॉइट में एक भीषण विमान हादसे में 154 लोग मारे गए थे, लेकिन एक 4 साल की बच्ची सेसिलिया सिचन चमत्कारिक रूप से बच गई थी। वो अपनी सीट से बंधी थी और मलबे में जीवित पाई गई।
पीछे की सीटें और इमरजेंसी एग्जिट के पास होती हैं अपेक्षाकृत सुरक्षित
टाइम मैग्जीन के एक अध्ययन के अनुसार, विमान की पीछे की सीटों पर मृत्यु दर लगभग 28% होती है जबकि आगे और मध्य भाग की सीटों पर ये दर बढ़कर 44% तक जाती है।
ग्रीनविच यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट बताती है कि इमरजेंसी एग्जिट से 5 पंक्तियों के अंदर बैठने वालों के बचने की संभावना सबसे अधिक होती है, क्योंकि वहां से जल्दी बाहर निकला जा सकता है।
सबसे खतरनाक मानी जाती हैं बीच की और विंग्स के पास की सीटें
विमान के बीच के हिस्से में फ्यूल टैंक होते हैं, जो विस्फोट का बड़ा कारण बन सकते हैं।
रिसर्च के मुताबिक, विंग के पास की सीटें और गलियारे के पास की सीटों पर बैठे यात्रियों की मृत्यु दर अधिक पाई गई है।
वहीं विंडो सीट पर बैठे यात्रियों के लिए आग लगने की स्थिति में खतरा ज्यादा होता है, हालांकि किसी भी विमान हादसे की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि टेक-ऑफ की गति, मौसम, जमीन की सतह और पायलट की प्रतिक्रिया।
आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।
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