AC खरीदते वक्त जो सबसे बड़ी गलती लोग करते हैं वो है…
1.5 टन AC खरीदने जा रहे हैं? सिर्फ टन देखकर मत खरीदिए, असली गेम चेंजर है कूलिंग कैपेसिटी। जानिए पूरी कहानी, सही कूलिंग कैसे चुनें और क्या है AC खरीदने का सही तरीका।
AC खरीदते वक्त जो सबसे बड़ी गलती लोग करते हैं वो है…
  • Category: सामान्य ज्ञान

गर्मी ने जब कमर तोड़नी शुरू की, तब लोगों ने AC की तलाश शुरू की। लेकिन इसी तलाश में वो एक ऐसी चूक कर बैठते हैं, जिसका असर उन्हें महीनों तक बिजली बिल और घटिया कूलिंग के रूप में झेलना पड़ता है।

और ये चूक होती है, सिर्फ "टन" देखकर AC खरीद लेना, कूलिंग कैपेसिटी को नजरअंदाज करना।


क्या है कूलिंग कैपेसिटी और क्यों है ये इतनी जरूरी?

दरअसल, आमतौर पर जब कोई 1.5 टन AC खरीदने बाजार या ऑनलाइन वेबसाइट्स पर जाता है, तो उसे लगता है कि बस टन ही सबकुछ है। मगर असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है।

एक ही 1.5 टन के कई AC मॉडल अलग-अलग कूलिंग कैपेसिटी के साथ आते हैं, और यही चीज़ आपकी जेब, कमरे की ठंडक और बिजली की खपत पर सीधा असर डालती है।

आपको बता दें कि कूलिंग कैपेसिटी का सीधा मतलब होता है कि AC कितनी गर्मी कमरे से निकाल सकता है। इसे वॉट (Watt) या BTU में मापा जाता है, मगर भारत में ज्यादातर कंपनियां इसे वॉट में दिखाती हैं।

जितनी ज्यादा वॉट, उतनी ज्यादा कूलिंग पावर और उतनी ही जल्दी कमरा ठंडा होगा।


सिर्फ 1.5 टन नहीं, असली फर्क Watt में छिपा है

अब जरा गौर करें, हमने जब अमेजन पर अलग-अलग ब्रांड्स के 1.5 टन स्प्लिट AC मॉडल्स देखे, तो कूलिंग कैपेसिटी कुछ इस तरह की मिली: 3300W, 4400W, 4750W, 4800W, 5000W, 5010W, 5050W और यहां तक कि 5400W तक। अब सवाल उठता है, सब 1.5 टन ही हैं तो फिर इतना फर्क क्यों?

असल में "टन" सिर्फ एक सामान्य माप है, मगर असली बात तो है कूलिंग कैपेसिटी। दो ACs का टन एक जैसा हो सकता है, मगर अगर एक की कूलिंग कैपेसिटी 3300W है और दूसरे की 5400W, तो अंतर सीधा आपके ठंडक के अनुभव में दिखेगा।

पहला AC धीमा ठंडा करेगा, ज्यादा समय तक चलेगा और बिजली ज्यादा खींचेगा। वहीं दूसरा AC कम समय में काम करेगा और कम खर्च करेगा।


कम Watt का मतलब है ज्यादा बिल और कम ठंडक

यही नहीं, अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां ज्यादा गर्मी पड़ती है, धूप ज्यादा आती है या रूम इंसुलेटेड नहीं है, तो कम कूलिंग कैपेसिटी वाला AC आपके किसी काम का नहीं।

ऐसे में AC का कंप्रेसर बार-बार चालू होगा, मशीन पर लोड बढ़ेगा और सर्विसिंग का खर्चा अलग से आएगा।


कैसे पहचानें सही कूलिंग कैपेसिटी वाला AC?

अब बात करें कि सही कूलिंग कैपेसिटी कैसे पहचानी जाए, तो ये जानना बहुत आसान है।

हर AC यूनिट पर एक स्टार रेटिंग स्टिकर लगा होता है, उसी में लिखा होता है “Rated Cooling Capacity” या “Cooling Capacity - XXXX Watts”।

वहीं से आपको पता चलेगा कि वो AC असल में कितनी हीट रिमूव कर सकता है।


रूम साइज के हिसाब से कितनी होनी चाहिए कूलिंग कैपेसिटी?

बात अगर रूम साइज की करें, तो सामान्यतः 100 से 120 स्क्वेयर फीट वाले कमरे के लिए करीब 3500W की जरूरत होती है।

150 से 180 स्क्वेयर फीट के लिए 4500 से 5000W और 200 से 250 स्क्वेयर फीट के लिए कम से कम 5500W की कूलिंग कैपेसिटी होनी चाहिए।

लेकिन मज़ेदार बात ये है कि लोग सिर्फ टन देखकर 1.5 टन AC उठा लेते हैं और बाद में शिकायत करते हैं कि AC चलाकर भी गर्मी लगती है।


सस्ता AC, कम कूलिंग - एक जाल जिसमें लोग बार-बार फंसते हैं

यहां एक और बात ध्यान देने लायक है, कुछ कंपनियां सस्ते दाम में AC देती हैं, मगर उसकी कूलिंग कैपेसिटी बहुत कम होती है।

लोग प्राइस देखकर खरीद लेते हैं और बाद में पछताते हैं। याद रखिए, कम कीमत में अगर वॉट कम है, तो वो डील नहीं बल्कि एक जाल है।


सही तरीका क्या है AC खरीदने का?

अब अगर आप भी नया AC खरीदने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले अपने रूम की साइज मापिए, फिर उस हिसाब से कूलिंग कैपेसिटी चुनिए।

1.5 टन में भी 4800W से नीचे की कूलिंग कैपेसिटी वाला मॉडल सिर्फ उन्हीं के लिए सही है जो छोटे रूम में AC इस्तेमाल कर रहे हैं।


स्टार रेटिंग नहीं, Watt ही बताएगा असली बचत

साथ ही, बिजली की बचत के नाम पर जो लोग स्टार रेटिंग देखते हैं, उन्हें भी ये समझना जरूरी है कि अगर कूलिंग कैपेसिटी कम होगी, तो मशीन लंबे समय तक चलेगी, जिससे बिजली की खपत वैसे ही ज्यादा होगी।

यानी कम वॉट वाला AC, ज्यादा देर तक चलकर, स्टार रेटिंग का भी कोई फायदा नहीं छोड़ेगा।


Watt ही असली हीरो है

तो कुल मिलाकर, अगली बार जब आप AC खरीदने निकलें, तो टन को सिर्फ नंबर मानिए और असली फैसले की चाबी, कूलिंग कैपेसिटी (Watt) को देखिए।

यही एक फैक्टर है जो तय करेगा कि AC आपके लिए आराम लाएगा या और झंझट।

आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।

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