भीड़ से दूर, शांति के करीब: जोधपुर की 5 अनदेखी जगहें!
भीड़ से हटकर जोधपुर को नए अंदाज में देखना चाहते हैं? जानिए ब्लू सिटी की 5 अनदेखी जगहों के बारे में जहां कम ही टूरिस्ट पहुंचते हैं, लेकिन अनुभव भरपूर मिलता है। ट्रैवल लवर्स के लिए एक खास गाइड।
भीड़ से दूर, शांति के करीब: जोधपुर की 5 अनदेखी जगहें!
  • Category: भारत

राजस्थान की शान और ऐतिहासिक पहचान रखने वाला शहर जोधपुर, आमतौर पर मेहरानगढ़ किला, उम्मेद भवन पैलेस और नीली गलियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस शहर के अंदर कुछ ऐसी अनदेखी, अनसुनी और अनछुई जगहें भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम टूरिस्ट जानते हैं।

जी हाँ, अगर आप भी भीड़ से हटकर एक अलग और सच्चे जोधपुर को देखना चाहते हैं, तो ये ट्रैवल गाइड आपके लिए ही है! आइए अब बिना और देरी के, जानते हैं ब्लू सिटी के वो 5 हिडन स्पॉटस!


  1. खीचन गांव - पक्षियों का स्वर्ग, इंसानों से दूर


जोधपुर से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित ये छोटा-सा गांव हर साल अक्टूबर से मार्च तक हजारों की संख्या में आने वाले डेमोइसेल क्रेन्स (कुंच) पक्षियों की मेहमाननवाज़ी करता है।

यहां के ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी सहायता के पक्षियों के लिए खास व्यवस्था की है।

ये अनुभव खासकर बर्ड वॉचिंग में रुचि रखने वालों और शांत वातावरण की तलाश करने वालों के लिए बेहद खास साबित हो सकता है।


  1. राव जसवंत सिंह पार्क - किले की गोद में छिपा नज़ारा


मेहरानगढ़ किले की तलहटी में स्थित ये इकोलॉजिकल पार्क 2006 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य था बंजर भूमि को हरा-भरा बनाना।

ट्रेकिंग ट्रेल्स, हर्बल प्लांट्स और रॉक फॉर्मेशन्स के बीच से होकर गुजरती ये जगह नेचर लवर्स और फोटोग्राफर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं।

यहां से किले और पूरे जोधपुर का जो पैनोरमिक व्यू मिलता है, वो आपको बार-बार खींच लाएगा।


  1. मंडोर - इतिहास की चुप कहानियां


जोधपुर से केवल 9 किलोमीटर दूर स्थित ये जगह कभी मारवाड़ की राजधानी हुआ करती थी।

यहां के मंडोर गार्डन, प्राचीन छतरियां और रावों की संगमरमर की मूर्तियां आज भी उस गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं।

हनुमान मंदिर, पुराने खंडहर और घने पेड़-पौधे इस जगह को एक मिस्टिकल एहसास देते हैं। भीड़ से दूर, आत्मचिंतन के लिए इससे बेहतर जगह शायद ही मिले।


  1. कायलाना झील - जोधपुर की छुपी हुई झील


शहर के पश्चिमी छोर पर स्थित कायलाना लेक शांतिप्रिय लोगों के लिए एक बेहतरीन स्पॉट है।

बोटिंग, बर्ड वॉचिंग और सुबह-सुबह का सूरज जब झील के पानी पर पड़ता है, तो दृश्य मंत्रमुग्ध कर देता है।

ये जगह खासकर उन टूरिस्ट्स के लिए है, जो चहल-पहल से दूर, प्राकृतिक सौंदर्य में डूबना चाहते हैं।


  1. बिश्नोई गांव - प्रकृति प्रेमियों की जमीन


जोधपुर से थोड़ी दूरी पर स्थित ये गांव, भारत के सबसे ईको-सेंसिटिव समुदायों में से एक है।

बिश्नोई समाज के लोग पेड़-पौधों और जानवरों के संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं।

यहां आपको काले हिरण, मिट्टी के बर्तन बनाते कारीगर और स्थानीय जीवनशैली को नजदीक से देखने का मौका मिलेगा।

ये जगह आपको सिखाएगी कि प्रकृति से जुड़कर भी जीवन कितना खूबसूरत हो सकता है।

बहरहाल, आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।

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