ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी बातचीत तेज की है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार 23 मार्च 2026
को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की।
इसके साथ ही उन्होंने खाड़ी देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की और
पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।
रुबियो से क्या बात हुई
जयशंकर
ने सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी मार्को रुबियो के साथ विस्तृत टेलीफोन पर बातचीत
हुई।
उन्होंने कहा कि इस चर्चा में पश्चिम एशिया के संघर्ष और उसके
अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर फोकस रहा।
खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई और आगे भी संपर्क
में रहने पर सहमति बनी।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब मिडिल ईस्ट के हालात का असर तेल,
आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
खाड़ी देशों के राजदूतों से मुलाकात
जयशंकर
ने गल्फ कॉर्पोरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के राजदूतों से भी मुलाकात की।
इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात,
बहरीन, ओमान, कुवैत और
कतर के राजदूत शामिल हुए।
बैठक के दौरान सभी ने मिडिल ईस्ट के हालात पर अपने विचार साझा किए।
जयशंकर ने इन देशों को वहां रह रहे भारतीयों के समर्थन के लिए
धन्यवाद भी दिया।
भारत की आंतरिक तैयारी
उपलब्ध
जानकारी के मुताबिक भारत में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने भी हाल में एक
अहम बैठक की थी।
इस बैठक में इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के
बाद बने हालात से निपटने के उपायों पर चर्चा हुई थी।
खास तौर पर अनाज, फ्यूल और खाद की सप्लाई को
सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया गया।
सरकार मिडिल ईस्ट में रह रहे करीब 1 करोड़
भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क बताई गई है।
इनमें से लगभग 80 लाख भारतीय सिर्फ सऊदी अरब
और यूएई में रहते हैं।
दूसरे देशों से भी संपर्क
जयशंकर
ने सोमवार को श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ से भी बात की।
इस बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात के असर पर चर्चा हुई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक श्रीलंका ने इस संकट के चलते भारत से
अतिरिक्त ईंधन की मांग की है और भारत इस पर विचार कर रहा है।
इसके अलावा जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से भी
बातचीत की और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।
मौजूदा स्थिति
भारत
सरकार इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखे हुए है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सरकार देश की जरूरतों और विदेशों में रह
रहे भारतीयों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कदम उठा रही है।
रुबियो से बातचीत, खाड़ी देशों के राजदूतों से
मुलाकात और दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क को इसी कूटनीतिक प्रयास का
हिस्सा माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय
नागरिकों की सुरक्षा दोनों भारत की प्राथमिकता में शामिल दिखाई दे रही हैं।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!