ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कार्यालय से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में जांच के दौरान कई नए दावे सामने आए हैं। हाल ही में अदालत में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने पीड़ित महिलाओं के बयानों और जांच के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल की हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप और दावे अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।
चार्जशीट में क्या सामने आया?
जांच एजेंसियों द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट के अनुसार, कुछ पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें कथित रूप से धार्मिक विचारों से प्रभावित करने की कोशिश की गई। एक महिला ने दावा किया कि उसे इस्लाम धर्म से जुड़े वीडियो देखने के लिए कहा गया और कुछ धार्मिक उपदेशकों के भाषण सुनने की सलाह दी गई। महिला के अनुसार, मानसिक तनाव दूर करने के नाम पर उसे धार्मिक सामग्री दिखाई जाती थी और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती थी। चार्जशीट में दर्ज बयानों के मुताबिक कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी चर्चा की और अलग-अलग प्रकार के सुझाव दिए।
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप
चार्जशीट में शामिल एक बयान के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि एक आरोपी ने उससे विवाह का वादा किया और बाद में उसका यौन शोषण किया। महिला का कहना है कि आरोपी ने उसके निजी और आर्थिक जीवन से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर ली थी। जांच अधिकारियों के अनुसार, ऐसे आरोपों की सत्यता की जांच के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।
कई महिलाओं ने दर्ज कराई शिकायत
इस मामले में अब तक नौ महिलाओं द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि सभी शिकायतों में कुछ समान पैटर्न दिखाई दे रहे हैं, जिनमें कथित यौन उत्पीड़न, धार्मिक टिप्पणियां और मानसिक दबाव जैसे आरोप शामिल हैं। SIT की जांच के अनुसार कुछ शिकायतों में कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार, आपत्तिजनक टिप्पणियां और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं।
106 गवाहों के बयान शामिल
चार्जशीट में कुल 106 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इनमें शिकायतकर्ता महिलाएं, उनके परिजन, TCS के कर्मचारी, कंपनी प्रबंधन, POSH समिति के सदस्य तथा जांच अधिकारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह घटनाएं व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थीं या इसके पीछे कोई संगठित पैटर्न मौजूद था।
HR और प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में
कुछ पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बावजूद समय पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से जांच में कंपनी के कुछ अधिकारियों और HR विभाग की भूमिका भी शामिल की गई है। पुलिस डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप ग्रुप्स से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
TCS ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर TCS पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या जबरदस्ती के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति पर काम करती है। कंपनी ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
जांच जारी, अदालत में होगी सच्चाई की परीक्षा
फिलहाल इस मामले में कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और SIT की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोपों ने कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में कर्मचारियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और कार्य संस्कृति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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