ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पुणे स्थित Wipro कैंपस में काम कर चुकी एक पूर्व महिला कर्मचारी ने अपनी बॉस और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि नौकरी के दौरान उन्हें उनके धार्मिक विश्वासों के कारण परेशान किया गया और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए लगातार दबाव बनाया गया। मानसिक तनाव और कथित उत्पीड़न से परेशान होकर उन्हें आखिरकार नौकरी छोड़नी पड़ी। इस मामले ने आईटी सेक्टर में कार्यस्थल के माहौल, धार्मिक स्वतंत्रता और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
2019 से 2025 तक किया काम
शिकायतकर्ता महिला के अनुसार वह वर्ष 2019 से 2025 तक पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित Wipro कार्यालय में कार्यरत थीं। इस दौरान उनके साथ काम करने वाले कुछ वरिष्ठ अधिकारी और टीम लीडर उनके धार्मिक विश्वासों को लेकर लगातार टिप्पणी करते थे। महिला का आरोप है कि उन्हें कई बार इस्लाम धर्म अपनाने और उससे जुड़ी कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करने के लिए कहा गया। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके प्रति अधिकारियों का व्यवहार बदल गया।
खराब रिव्यू और नौकरी से निकालने की धमकी का आरोप
महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद उन्हें खराब परफॉर्मेंस रिव्यू देने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, नौकरी से निकालने की बात भी कही गई। उनका आरोप है कि उनकी मैनेजर ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया और लगातार दबाव बनाया। महिला का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ा। लगातार तनाव और कथित उत्पीड़न के कारण उन्होंने अंततः नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
कंपनी की आंतरिक व्यवस्था से नहीं मिली मदद
महिला का कहना है कि उन्होंने कंपनी के भीतर मौजूद शिकायत निवारण प्रणाली का भी सहारा लिया था। हालांकि उन्हें वहां से कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही उन्होंने राज्य मानवाधिकार आयोग से भी हस्तक्षेप की मांग की है।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुणे पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार शिकायत प्राप्त हो चुकी है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कंपनी ने शिकायत मिलने के बाद क्या कदम उठाए थे। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Wipro ने क्या कहा?
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए Wipro ने कहा है कि कर्मचारियों की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के भेदभाव, उत्पीड़न या व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन के प्रति उसकी "जीरो टॉलरेंस" नीति है। Wipro का कहना है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। हालांकि कंपनी ने यह भी कहा कि मामला जांच के अधीन होने के कारण वह आरोपों के विवरण पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकती।
आईटी सेक्टर में फिर शुरू हुई बहस
इस घटना के बाद कॉर्पोरेट जगत में धार्मिक स्वतंत्रता, कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले नासिक स्थित एक TCS BPO केंद्र से भी कथित धार्मिक उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े आरोप सामने आए थे। ऐसे मामलों ने कंपनियों के कार्यस्थल वातावरण और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल सभी की नजरें पुणे पुलिस की जांच पर हैं, क्योंकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी।
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