ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और शस्त्र लाइसेंस के कथित दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रदेश के कई चर्चित बाहुबली नेताओं और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के हथियार लाइसेंस की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस सूची में Raghuraj Pratap Singh, Dhananjay Singh और Brij Bhushan Sharan Singh जैसे बड़े नाम शामिल हैं। अदालत ने राज्य सरकार और सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले में जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। अदालत ने टिप्पणी की कि आत्मरक्षा के नाम पर खुलेआम हथियार लेकर घूमना कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करती है, लेकिन कई मामलों में प्रभावशाली लोगों से जुड़ी जानकारी छिपाई गई। अदालत ने इसे गंभीर मामला माना।
19 बाहुबलियों के लाइसेंस की रिपोर्ट तलब
हाईकोर्ट ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों और जोनों से जुड़े 19 प्रभावशाली नेताओं और बाहुबलियों के हथियार लाइसेंस का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि इन लोगों को किस आधार पर लाइसेंस जारी किए गए, उनके खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हैं और क्या लाइसेंस जारी करते समय उनके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच हुई थी। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि इन लोगों के परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियार लाइसेंस हैं या नहीं।
यूपी में 10 लाख से ज्यादा हथियार लाइसेंस
कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी। जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अब तक 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। वहीं हजारों आवेदन अभी लंबित हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 6 हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को भी लाइसेंस दिए गए हैं जिनके खिलाफ दो या उससे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा 20 हजार से ज्यादा परिवारों के पास एक से अधिक हथियार लाइसेंस मौजूद हैं।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कई जिलों के डीएम, पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शस्त्र लाइसेंस से जुड़े नियमों और सरकारी आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने माना कि लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासन को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
राजनीति और कानून व्यवस्था पर बढ़ी चर्चा
इस मामले के सामने आने के बाद यूपी की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, वे लंबे समय से राजनीति और बाहुबली छवि को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला सिर्फ हथियार लाइसेंस तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यूपी में कानून व्यवस्था, राजनीतिक प्रभाव और गन कल्चर पर बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है।
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