ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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सर्दियों के मौसम में देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण हमेशा एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। अक्सर सभी का ध्यान दिल्ली की हवा की खराब गुणवत्ता की ओर जाता है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने इस धारणा को बदल दिया है। स्विस कंपनी IQAir की वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के अनुसार, दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर अब दिल्ली नहीं, बल्कि उसके पास स्थित लोनी शहर है।
लोनी में वायु प्रदूषण का स्तर चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित लोनी ने 2025 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर होने का खिताब पाया। इस शहर में PM 2.5 का वार्षिक औसत स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से लगभग 22 गुना अधिक है। पिछले साल की तुलना में यह स्तर करीब 23 प्रतिशत बढ़ गया है।
लोनी, दिल्ली से सटा हुआ है और इसका नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र में होना पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण के फैलाव को बढ़ाता है। PM 2.5 कण बहुत छोटे होते हैं और सांस के जरिए सीधे फेफड़ों और खून तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहने से अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
दिल्ली की स्थिति और वैश्विक रैंकिंग
रिपोर्ट में नई दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया है, जबकि दिल्ली शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में चौथे नंबर पर रहा। भारत के बर्नीहाट शहर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस तरह, दुनिया के शीर्ष पांच प्रदूषित शहरों में तीन शहर भारत से हैं।
देश स्तर पर देखा जाए तो भारत दुनिया का छठा सबसे ज्यादा प्रदूषित देश बन चुका है। देश में वायु प्रदूषण का स्तर WHO के निर्धारित मानकों से लगभग 10 गुना अधिक है।
प्रदूषण के प्रमुख कारण
लोनी और उसके आसपास के इलाकों में प्रदूषण के कई कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं:
• औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी
• ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआँ
• भारी वाहन और ट्रैफिक का दबाव
• सर्दियों में ठंडी और स्थिर हवा, जो प्रदूषण को नीचे रोकती है
• पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के केवल 14 प्रतिशत शहर ही WHO के तय मानकों पर खरे उतरे हैं, जबकि यह आंकड़ा पिछले साल 17 प्रतिशत था।
वैश्विक तुलना
दुनिया में सबसे प्रदूषित देशों की सूची में पाकिस्तान पहले, बांग्लादेश दूसरे और ताजिकिस्तान तीसरे नंबर पर हैं। यह दर्शाता है कि दक्षिण और मध्य एशिया क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
लोनी का यह आंकड़ा यह दिखाता है कि केवल बड़े शहरों पर ही प्रदूषण का ध्यान नहीं देना चाहिए। छोटे शहर और उपनगरीय क्षेत्र भी गंभीर प्रदूषण की समस्या में शामिल हैं। नागरिकों और सरकार को मिलकर ऐसे उपाय करने होंगे, ताकि हवा की गुणवत्ता सुधारी जा सके और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सके।
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