ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद के बाद सियासत तेज हो गई है। इसी बीच डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई लोग इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर हिंदुत्व की पिच पर चुनावी तैयारी कर रही है और यह कदम उसी दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।
101 बटुकों का तिलक और माला से स्वागत
गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का तिलक और फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने बटुकों को सम्मानपूर्वक बैठाया और अपनी पत्नी के साथ उनका आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम के दौरान बटुकों ने भी पाठक के इस कदम की सराहना की।
बटुकों ने कहा कि वे अकेले ऐसे मंत्री हैं जिन्होंने बटुकों के साथ हुई बदसलूकी के मुद्दे को विधानसभा में उठाया। इस आयोजन को भाजपा की ओर से एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
डैमेज कंट्रोल की रणनीति?
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य से जुड़े विवाद के बाद ब्राह्मण समाज में नाराजगी की चर्चा थी। ऐसे में बटुकों का सम्मान करके भाजपा ने संभावित नाराजगी को कम करने का प्रयास किया है।
भाजपा खुद को हिंदुत्व की सबसे बड़ी झंडाबरदार पार्टी बताती है। लेकिन हालिया विवाद के बाद उसकी इस छवि पर सवाल उठे। ऐसे में यह कार्यक्रम पार्टी की ओर से डैमेज कंट्रोल की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
2027 के चुनाव की तैयारी?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि भाजपा हिंदू वोटों को एकजुट रखने के लिए धर्म और आस्था के मुद्दों पर फोकस कर रही है।
ब्रजेश पाठक को एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के रूप में सामने लाकर पार्टी ब्राह्मण वर्ग को संदेश देना चाहती है कि उनकी आस्था और सम्मान सर्वोपरि है।
भाजपा का संदेश क्या?
इस पूरे कार्यक्रम से भाजपा ने कई संकेत देने की कोशिश की है:
• हिंदू आस्था के प्रतीकों और परंपराओं के प्रति पार्टी की गहरी आस्था है।
• मौनी अमावस्या की घटना को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया गया और यह संदेश दिया गया कि पार्टी बटुकों और संतों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी।
• जाति से ऊपर धर्म को रखकर हिंदू वोटों को एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है।
• ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी को शांत करने के लिए ब्रजेश पाठक को केंद्र में रखा गया।
पहले भी दिया था सख्त बयान
इससे पहले ब्रजेश पाठक ने बटुकों की शिखा खींचे जाने की घटना को “महापाप” बताया था। उन्होंने कहा था कि शिखा को छूना भी पाप है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके इस बयान को भी ब्राह्मण समाज के समर्थन में देखा गया था।
कुल मिलाकर, बटुक सम्मान कार्यक्रम ने यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के चुनाव तक यह रणनीति कितना असर दिखाती है।
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