ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में इन दिनों ठाकुर जी के दर्शन को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया है। गर्भगृह की जगह जगमोहन से दर्शन कराने के फैसले ने गोस्वामी समाज के एक वर्ग और हाई पावर्ड कमेटी के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। हालात बिगड़ते देख कमेटी ने आपात बैठक बुलाई और कई अहम फैसले लिए।
जगमोहन से दर्शन कराने का फैसला क्यों?
मंदिर में लगातार बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती को देखते हुए कमेटी ने फैसला किया था कि श्रद्धालुओं को गर्भगृह की बजाय जगमोहन से दर्शन कराए जाएंगे। कमेटी का कहना है कि इससे भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और श्रद्धालुओं को धक्का-मुक्की से राहत मिलेगी।
हालांकि गोस्वामी समाज के कुछ लोग इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गर्भगृह से ही दर्शन होना चाहिए और इसे बदलना आस्था से समझौता है।
मंदिर परिसर में हंगामा
बीते दिन इस मुद्दे को लेकर मंदिर परिसर में नारेबाजी और हंगामे की स्थिति बन गई। आरोप है कि जब ठाकुर जी जगमोहन में विराजमान थे, उसी दौरान कुछ गोस्वामी और उनके समर्थक वहां चढ़ गए और विरोध जताने लगे।
हाई पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष और रिटायर्ड जज अशोक कुमार ने कहा कि यह विरोध पूर्व नियोजित था और कमेटी पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने साफ कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित लोगों को अंतिम चेतावनी दी गई है।
शाम के दर्शन और नई व्यवस्था
आपात बैठक में यह भी तय हुआ कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शाम के समय भी जगमोहन से ही दर्शन कराने का अनुरोध किया जाएगा। कमेटी का कहना है कि यह फैसला भक्तों की भलाई और बेहतर व्यवस्था के लिए लिया गया है। हालांकि विरोध कर रहे गोस्वामी अपने रुख पर कायम हैं और इसे परंपरा में हस्तक्षेप बता रहे हैं।
मीडिया एंट्री पर रोक
बैठक में एक बड़ा फैसला मीडिया को लेकर भी लिया गया। अध्यक्ष अशोक कुमार के अनुसार, कुछ पत्रकारों को पहले से बुलाया गया था और वे जगमोहन पर खड़े होकर वीडियो बना रहे थे, जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई। इसके बाद तय किया गया कि अब मंदिर के अंदर पत्रकारों को वीडियो बनाने की अनुमति नहीं होगी। मीडिया से बातचीत मुख्य द्वार के बाहर ही की जाएगी।
जंजीर और आसन पर उठे सवाल
गर्भगृह के दरवाजे पर जंजीर लगाने का वीडियो सामने आने के बाद भी सवाल उठे। इस पर कमेटी ने कहा कि यह कदम भीड़ नियंत्रण के लिए “नेक इरादे” से उठाया गया था। लकड़ी के जर्जर आसन पर ठाकुर जी को विराजित करने के आरोप पर अध्यक्ष ने माना कि पहले दिन कुछ चूक हुई थी, लेकिन अब ठाकुर जी को चांदी के आसन पर विराजमान कराया गया है।
परंपरा बनाम व्यवस्था
कमेटी ने परंपरा तोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पहले भी जगमोहन से दर्शन का प्रचलन रहा है। उनका कहना है कि कोई नई परंपरा नहीं बनाई गई है, बल्कि व्यवस्था को बेहतर करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल मंदिर प्रबंधन, गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं के बीच मतभेद बने हुए हैं। सभी की नजर इस बात पर है कि यह विवाद आपसी संवाद से सुलझेगा या आगे और गहराएगा। श्रद्धालु चाहते हैं कि आस्था और शांति दोनों कायम रहें और उन्हें बिना विवाद के ठाकुर जी के दर्शन मिलते रहें।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!