ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां सिर्फ चुनाव के समय दलितों को याद करती हैं और उन्हें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती हैं।
‘दलित चमचे चुप रहें’ – मायावती का बयान
मायावती ने अपने बयान में काफी सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि “सपा-कांग्रेस के दलित चमचे चुप ही रहें तो बेहतर होगा।” उनका कहना था कि इन पार्टियों के नेता दलित समाज के हितों की बात नहीं करते, बल्कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं।
कांशीराम के नाम पर सियासी घमासान
मायावती ने कांशीराम के नाम पर राजनीति करने को लेकर भी सपा और कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही ये दल अचानक कांशीराम जयंती मनाने लगे हैं, जबकि पहले उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कांशीराम को भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया। अब दूसरी सरकार से इसकी मांग करना “हास्यास्पद” है।
भारत रत्न को लेकर सवाल
मायावती ने दावा किया कि उन्होंने खुद 2007 में कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई थी, लेकिन उस समय कांग्रेस सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा दलितों के वोट लिए, लेकिन उन्हें सत्ता में उचित भागीदारी नहीं दी।
सपा पर भी साधा निशाना
सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, मायावती ने सपा पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा ने अपनी सरकार के दौरान बसपा के समय किए गए कांशीराम के सम्मान से जुड़े कार्यों को बदल दिया था। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि वह भी अब चुनाव के समय दलित वोट पाने के लिए कांशीराम का नाम इस्तेमाल कर रही है।
‘चमचा युग’ का जिक्र
मायावती ने अपने बयान में कांशीराम की लिखी किताब “चमचा युग” का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस के नेताओं को यह किताब पढ़नी चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि दलित समाज के साथ किस तरह की राजनीति की जाती रही है।
बसपा की ताकत पर भरोसा
मायावती ने यह भी साफ किया कि उनके रहते बसपा को कोई कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने उन्हें खुद अपना उत्तराधिकारी बनाया था और पार्टी आज भी उसी विचारधारा पर चल रही है।
दलित वोट बैंक पर नजर
असल में, यह पूरा विवाद दलित वोट बैंक को लेकर है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी पार्टियां इस वर्ग को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं। मायावती का मानना है कि सपा और कांग्रेस की कोशिश सिर्फ चुनावी लाभ के लिए है, जबकि बसपा हमेशा से दलितों के अधिकारों के लिए लड़ती रही है।
यूपी में दलित राजनीति को लेकर सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। मायावती के इस बयान ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में दलित वोट बैंक को लेकर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। अब देखना होगा कि सपा, कांग्रेस और बसपा के बीच यह सियासी जंग आगे किस दिशा में जाती है और इसका असर चुनावी नतीजों पर कितना पड़ता है।
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