ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक सड़क हादसे को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। इस हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई थी। अब उनके पिता राजकुमार मेहता ने कहा है कि उन्होंने न्याय की उम्मीद छोड़ दी है और अब वह कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएंगे। राजकुमार मेहता का कहना है कि प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ अकेले लंबी कानूनी लड़ाई लड़ना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो, जो भविष्य में किसी और परिवार के साथ ऐसा हादसा होने से रोक सके।
17 जनवरी की रात हुआ था दर्दनाक हादसा
17 जनवरी की रात घने कोहरे के बीच युवराज मेहता अपनी एसयूवी से जा रहे थे। आरोप है कि निर्माणाधीन स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। इसी दौरान उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल पर न तो बैरिकेडिंग थी, न कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए लाइफ जैकेट जैसी जरूरी व्यवस्थाएं मौजूद थीं।
'डेढ़ घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे युवराज'
परिवार का दावा है कि हादसे के बाद युवराज करीब डेढ़ घंटे तक कार की छत पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे, लेकिन रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंच सकी। परिजनों का मानना है कि यदि बचाव कार्य में देरी नहीं होती और सुरक्षा इंतजाम बेहतर होते, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी।
SIT रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
हादसे के बाद शासन ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी गई, लेकिन परिवार का आरोप है कि अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। राजकुमार मेहता का कहना है कि कुछ अधिकारियों को शुरुआती कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया। इससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और कमजोर हो गई।
'अब बेटा सिर्फ सपनों में आता है'
अपने बेटे को याद करते हुए राजकुमार मेहता भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि अब युवराज केवल उनके सपनों में आता है। बेटी विदेश में रहती है और अब वे बेटे की यादों के सहारे ही जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी माता-पिता को ऐसी पीड़ा न सहनी पड़े, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार से की भावुक अपील
राजकुमार मेहता ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि इस मामले को केवल एक दुर्घटना मानकर न छोड़ा जाए। उनके अनुसार, यदि प्रशासनिक लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। परिवार का कहना है कि उनका बेटा अब वापस नहीं आएगा, लेकिन अगर इस हादसे से सबक लिया गया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हुई, तो भविष्य में कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
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