ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को बेहतर और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-बस सेवा को शुरुआती दिनों में ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होने और रूट-टाइमिंग की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है।
पहले दिन खाली दौड़ती रहीं बसें
ई-बस सेवा शुरू होने के बाद परिवहन विभाग ने रूट और समय सारिणी तो तय कर दी, लेकिन इसकी जानकारी आम लोगों तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच सकी। इसका नतीजा यह रहा कि कई बसें लगभग खाली ही चलती रहीं। एक परिचालक ने बताया कि सेक्टर-37 से चार मूर्ति तक के पहले फेरे में उन्होंने करीब एक घंटे तक यात्रियों का इंतजार किया, लेकिन कोई भी यात्री बस में नहीं चढ़ा। पूरे दिन में भी बस में गिने-चुने लोग ही सफर करते दिखाई दिए।
चालकों को भी नहीं पता पूरे रूट
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ बस चालक भी नए रूटों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। एक चालक ने बताया कि वह हाल ही में आगरा से यहां तैनात किए गए हैं और उन्हें सभी मार्गों की जानकारी नहीं है। ऐसे में उन्हें बस संचालन के लिए गूगल मैप और स्थानीय लोगों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे न केवल संचालन प्रभावित हो रहा है, बल्कि यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
लोग अभी भी ऑटो को दे रहे प्राथमिकता
बस कर्मचारियों का कहना है कि अधिकांश लोग अभी भी ऑटो और साझा वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। खासकर सिटी सेंटर, सेक्टर-52, चार मूर्ति और ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे क्षेत्रों में यात्रियों की पहली पसंद अभी भी ऑटो ही बने हुए हैं। मोरना डिपो के चालक मुकेश यादव ने बताया कि वे हर स्टॉप पर बस रोककर यात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोगों को अभी तक ई-बस सेवा के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
टाइमिंग को लेकर बनी हुई है उलझन
यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत बसों की टाइमिंग को लेकर है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक मूर्ति और चार मूर्ति क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि बसें तो दिखाई दे रही हैं, लेकिन उनके आने-जाने का निश्चित समय स्पष्ट नहीं है। एडवोकेट नीलम यादव के अनुसार, नोएडा से एक मूर्ति तक बस सेवा शुरू हो चुकी है, लेकिन टाइमिंग और फ्रीक्वेंसी की सही जानकारी न होने के कारण लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने की तैयारी
ई-बस सेवा को अधिक प्रभावी और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए नोएडा अथॉरिटी ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अथॉरिटी ने यूपीएसआरटीसी को 10 दिनों के भीतर एक ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस डैशबोर्ड के जरिए यात्रियों को बसों की लाइव लोकेशन, रूट, टाइमिंग और फ्रीक्वेंसी की जानकारी मिल सकेगी। इससे यात्रियों को बस का इंतजार करने में आसानी होगी और सार्वजनिक परिवहन पर भरोसा भी बढ़ेगा।
प्रचार-प्रसार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सार्वजनिक सेवा की सफलता उसके प्रभावी प्रचार पर निर्भर करती है। यदि लोगों को रूट, किराया, समय और सुविधाओं की सही जानकारी दी जाए तो ई-बस सेवा तेजी से लोकप्रिय हो सकती है। इसके लिए सोशल मीडिया, डिजिटल बोर्ड, बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशनों और स्थानीय अखबारों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
नोएडा की ई-बस सेवा शहर के सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि शुरुआती दौर में जानकारी के अभाव और टाइमिंग को लेकर भ्रम के कारण यात्रियों की संख्या कम है। यदि प्रशासन समय रहते प्रचार-प्रसार बढ़ाए और ऑनलाइन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो आने वाले दिनों में यह सेवा हजारों यात्रियों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकती है।
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