ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक आंदोलन और उसके बाद फैली हिंसा का मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा है। इस केस में विदेशी फंडिंग, संगठनों के नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच शुरू हो गई है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस का दावा है कि आंदोलन से जुड़े आरोपी सत्यम वर्मा के बैंक खाते में विदेशों से करीब एक करोड़ रुपये भेजे गए थे। पुलिस के अनुसार यह रकम डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में अलग-अलग देशों से ट्रांसफर की गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन पैसों का इस्तेमाल आंदोलन को संगठित करने, लोगों को जोड़ने और हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया गया हो सकता है।
हिंसा के बाद बढ़ी जांच की दिशा
13 अप्रैल को नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान कई इलाकों में प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग थानों में 13 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए। गौतमबुद्ध नगर पुलिस के एडिशनल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के मुताबिक जांच के दौरान सत्यम वर्मा और आकृति चौहान की भूमिका गंभीर पाई गई। इसी आधार पर दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सामान्य विरोध प्रदर्शन से कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आंदोलन के पीछे कौन-कौन लोग और संगठन सक्रिय थे।
विदेशी मुद्राओं में आया पैसा
जांच में सबसे बड़ा खुलासा आरोपी के बैंक खाते में हुए विदेशी ट्रांजेक्शनों को लेकर हुआ है। पुलिस के अनुसार खाते में डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी विदेशी करेंसी में रकम भेजी गई थी। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक यह रकम करीब एक करोड़ रुपये तक पहुंचती है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने यह पैसा अपने अन्य निजी खातों में भी ट्रांसफर किया। अब सभी बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि पैसा किन देशों से आया और इसका असली इस्तेमाल क्या था।
कई संगठनों से जुड़े होने की आशंका
जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि सत्यम वर्मा कई सामाजिक और अन्य संगठनों से जुड़ा हुआ था। अब इन संगठनों के फंडिंग नेटवर्क और गतिविधियों की भी जांच हो रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल डिजिटल ट्रेल, बैंक रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क की जानकारी सामने लाई जा सके।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला
दूसरी तरफ आरोपी पक्ष ने पुलिस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया है। सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट के वकील चौधरी अली जिया कबीर, जो आरोपी का पक्ष रख रहे हैं, ने कहा कि परिवार विदेशी फंडिंग के आरोपों को गलत बता रहा है। उनका कहना है कि अगर खाते में बड़ी रकम का कोई प्रमाण मिलता है तो सरकार उसे जब्त कर सकती है। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखने के लिए लगातार नई धाराएं जोड़ रही है।
पुलिस अब भी अलर्ट मोड में
हालांकि आंदोलन और हिंसा को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन नोएडा पुलिस अभी भी पूरी तरह सतर्क है। फेज-2 और सेक्टर-63 थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने और किसी भी अपुष्ट जानकारी को शेयर न करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी।
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