ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नोएडा में अंतरराष्ट्रीय हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा करते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक चीनी नागरिक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी कई वर्षों से शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में शामिल थे।
तीन आरोपी गिरफ्तार
एसटीएफ के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लियाओ लोंगहुई (Liao Longhui), संजीव कुमार और कौशलेन्द्र के रूप में हुई है।
• लियाओ लोंगहुई चीन के जियांग्शी प्रांत का निवासी है।
• संजीव कुमार गाजियाबाद का रहने वाला और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है।
• कौशलेन्द्र उत्तर प्रदेश के औरैया जिले का निवासी है।
तीनों को 22 जुलाई की रात नोएडा के सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी से गिरफ्तार किया गया।
कंपनी की जांच से खुला पूरा नेटवर्क
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा के अनुसार, सेक्टर-83 स्थित वाईटीएल प्राइवेट लिमिटेड की जांच के दौरान पूरे नेटवर्क का पता चला। यह कंपनी मोबाइल फोन कवर बनाने का कारोबार करती थी। दस्तावेजों की जांच में कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद एसटीएफ ने आगे की कार्रवाई की।
शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों का लेन-देन
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कई शेल कंपनियां बनाकर उनके माध्यम से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन किया। एसटीएफ के मुताबिक, लियाओ लोंगहुई ने अपने कर्मचारियों और ड्राइवरों के पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर कई कंपनियां खड़ी कीं। इन कंपनियों के जरिए बैंक खाते खोले गए और संदिग्ध लेन-देन किए गए। इसके अलावा, हवाला नेटवर्क के संचालन के लिए हांगकांग में पंजीकृत दो कंपनियों का भी इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
2018 में भारत आया, 2020 में वीजा खत्म
जांच एजेंसियों के अनुसार, लियाओ लोंगहुई वर्ष 2018 में भारत आया था। वह अपने ससुर और साले द्वारा स्थापित कंपनी का संचालन संभाल रहा था।एसटीएफ का दावा है कि उसका भारतीय वीजा 2020 में समाप्त हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था और कथित तौर पर हवाला तथा मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में शामिल था।
फर्जी आधार कार्ड भी बरामद
छापेमारी के दौरान एसटीएफ को आरोपी के पास से एक फर्जी आधार कार्ड भी मिला। इस आधार कार्ड पर तस्वीर लियाओ की थी, लेकिन नाम सैमुअल लोथा और पता कोहिमा (नागालैंड) दर्ज था। जांच एजेंसियां अब इस दस्तावेज को तैयार करने वाले नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं।
अंडर-इनवॉइसिंग के जरिए भेजा जाता था पैसा
एसटीएफ की शुरुआती जांच के मुताबिक, चीन से मोबाइल कवर बनाने का कच्चा माल ऊंची कीमत पर आयात किया जाता था। इसके बाद तैयार माल दिल्ली के करोल बाग और नेहरू प्लेस जैसे बाजारों में कथित तौर पर कम बिलिंग (Under-Invoicing) के जरिए बेचा जाता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से बचाई गई राशि हवाला चैनलों के माध्यम से चीन भेजी जाती थी।
करोड़ों के दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
एसटीएफ ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें शामिल हैं:
• 5 लैपटॉप
• 9 मोबाइल फोन
• 1 टैबलेट
• 2 चीनी पासपोर्ट
• 1 चीनी पहचान पत्र
• 10 कंपनियों की मुहरें
• 11 बैंक चेकबुक
• विभिन्न कंपनियों के दस्तावेज
• करीब 4.72 करोड़ रुपये मूल्य के बैंक चेक
• 15,400 रुपये नकद
चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका भी जांच के दायरे में
एसटीएफ का आरोप है कि गिरफ्तार चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार ने शेल कंपनियां बनाने और बैंक खाते खुलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब जांच एजेंसियां उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन, अन्य कंपनियों और संभावित नेटवर्क की भी विस्तृत जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
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