ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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असम में इस बार हुए चुनाव ने मतदान के मामले में नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य में कुल 84.42% वोटिंग दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे अधिक प्रतिशत है। इस भारी मतदान के पीछे सबसे बड़ी वजह पुरुष वोटरों की ज्यादा भागीदारी और मुस्लिम बहुल इलाकों में जबरदस्त वोटिंग मानी जा रही है।
पुरुष वोटरों ने निभाई बड़ी भूमिका
आंकड़ों के अनुसार, इस चुनाव में पुरुष वोटरों की भागीदारी 88.6% रही, जो महिलाओं के मुकाबले काफी ज्यादा है। वहीं, महिलाओं की वोटिंग 80.4% दर्ज की गई। हालांकि राज्य में कुल वोटरों में महिलाओं की संख्या लगभग बराबर (49.98%) है, लेकिन मतदान के दिन पुरुषों ने अधिक सक्रियता दिखाई। इससे कुल वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिली।
मुस्लिम बहुल इलाकों में जबरदस्त मतदान
जिन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां सबसे अधिक मतदान हुआ। इन इलाकों में औसतन 90.1% वोटिंग दर्ज की गई, जो राज्य के औसत से काफी ज्यादा है। सीटों की बात करें तो जालेसवर (94.31%), मनकाचर (94.08%) और गोलकगंज (93.42%) जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा मतदान हुआ। यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में लोगों ने चुनाव को लेकर काफी उत्साह दिखाया।
SC और ST सीटों का हाल
अनुसूचित जाति (SC) सीटों पर 84.9% मतदान हुआ, जो औसत के आसपास है। वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) सीटों पर यह आंकड़ा थोड़ा कम, 81.1% रहा।इससे यह साफ होता है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों में मतदान का स्तर अलग-अलग रहा, लेकिन कुल मिलाकर भागीदारी अच्छी रही।
शहरी इलाकों में कम रहा उत्साह
जहां एक तरफ ग्रामीण और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारी मतदान हुआ, वहीं शहरी इलाकों में वोटिंग अपेक्षाकृत कम रही। गुवाहाटी सेंट्रल में 75.23%, दिसपुर में 73.98% और न्यू गुवाहाटी में सिर्फ 71.27% मतदान हुआ। इसके अलावा जिन इलाकों में महिला वोटरों की संख्या ज्यादा है, वहां भी वोटिंग का प्रतिशत थोड़ा कम देखा गया।
नए वोटरों में दिखा जोश
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के जरिए जुड़े नए वोटरों ने इस चुनाव में खासा उत्साह दिखाया। जहां कुल SIR क्षेत्रों में 82.7% मतदान हुआ, वहीं नए जुड़े वोटरों में 86.2% लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। यह संकेत देता है कि पहली बार वोट देने वाले युवाओं में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस भारी मतदान को “ऐतिहासिक” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन की तरह था। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपरा और जमीन की रक्षा के लिए बढ़-चढ़कर मतदान किया। कई बूथों पर 95% से ज्यादा वोटिंग हुई, जो सामान्य नहीं बल्कि इतिहास बनाने जैसा है।
असम का यह चुनाव कई मायनों में खास रहा। जहां एक ओर रिकॉर्ड मतदान ने लोकतंत्र को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर यह साफ संकेत भी दिया कि अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में मतदान का रुझान अलग-अलग रहा। पुरुष वोटरों की सक्रियता और मुस्लिम बहुल इलाकों में भारी मतदान इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी खासियत रही, जबकि शहरी इलाकों और महिला वोटरों की भागीदारी में सुधार की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
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