ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी में सियासी उथल-पुथल लगातार बढ़ती जा रही है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि पार्टी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। बागी नेताओं ने अलग बैठक कर विधायक अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया है। इसे ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी में शुरू हुआ असंतोष अब संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है।
विशेष बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
बागी गुट की बैठक विपक्ष के नेता रीताब्रता बनर्जी की अगुवाई में आयोजित की गई। इस बैठक में कई विधायक, पार्षद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव नियुक्त किया गया। इस नए संगठनात्मक ढांचे के बाद अभिषेक बनर्जी की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भूमिका भी प्रभावी रूप से समाप्त मानी जा रही है।
निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी जानकारी
बैठक के बाद रीताब्रता बनर्जी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है। उन्होंने बताया कि विशेष सत्र की पूरी कार्यवाही निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी और वही तय करेगा कि कौन-सा पक्ष वैध है। बागी गुट का दावा है कि बैठक में बड़ी संख्या में विधायक और कोलकाता नगर निगम के पार्षद शामिल हुए तथा सभी ने नए नेतृत्व का समर्थन किया।
जल्द बनेगा नया संगठन
बागी गुट ने घोषणा की है कि जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और पार्टी के प्रवक्ताओं का नया पैनल गठित किया जाएगा। उनका कहना है कि वे खुद को ही असली तृणमूल कांग्रेस मानते हैं और पार्टी को नए सिरे से संगठित करेंगे।
440 करोड़ रुपये के खातों पर भी रोक
इस राजनीतिक विवाद के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बागी विधायकों की शिकायत के बाद पुलिस ने पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर रोक लगा दी है। शिकायत में पार्टी फंड के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि बागी गुट ने ममता बनर्जी के लिए नरम रुख दिखाते हुए कहा कि यदि वह चाहें तो उन्हें मुख्य सलाहकार की भूमिका दी जा सकती है।
ममता गुट ने बताया अवैध
दूसरी ओर ममता बनर्जी के समर्थकों ने बागी गुट के सभी फैसलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी संविधान के तहत किसी भी बागी नेता को इस तरह का विशेष सत्र बुलाने या संगठन में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पूरक हैं और पार्टी पर केवल अधिकृत नेतृत्व का ही अधिकार है।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
ममता समर्थक नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की अनुशासन समिति जल्द ही बागी नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी। अरूप रॉय, फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास सहित कई नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इस बीच बागी गुट का दावा है कि पहले विधानसभा में और अब संसद में भी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि उनके साथ आ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी और संगठनात्मक लड़ाई का भी रूप ले सकता है।
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