ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच राज्य के मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी फिर्हाद हकीम ने AIMIM और पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर के गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस गठबंधन से मुस्लिम वोटों का कोई बंटवारा नहीं होगा।
BJP पर फंडिंग का आरोप
एक इंटरव्यू में फिर्हाद हकीम ने आरोप लगाया कि AIMIM और हुमायूं कबीर का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से चल रहा है। उनका कहना है कि इस गठबंधन के पीछे BJP का राजनीतिक फायदा छिपा हुआ है। हकीम ने कहा कि अगर वोटों का बंटवारा होता है, तो इसका सीधा फायदा उसी पार्टी को होगा, जो इस गठबंधन को समर्थन दे रही है।
“बंगाल के मुसलमान जागरूक हैं”
हकीम ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान काफी जागरूक हैं और वे सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उनके मुताबिक, यहां के लोग खुद को सिर्फ धर्म के आधार पर नहीं देखते, बल्कि एक सेक्युलर सोच के साथ आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने कहा कि बंगाल की राजनीति बिहार या उत्तर प्रदेश जैसी नहीं है, जहां धर्म के आधार पर वोटिंग होती है। यहां हिंदू और मुसलमान दोनों ही सांप्रदायिक एजेंडे को स्वीकार नहीं करते।
AIMIM और कबीर पर निशाना
फिर्हाद हकीम ने AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी को “सांप्रदायिक” बताते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे केवल कुछ खास लोगों के फायदे के लिए उठाए जाते हैं।
गौरतलब है कि हुमायूं कबीर को 2025 में TMC से बाहर कर दिया गया था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने का बयान दिया था। इसके बाद उन्होंने AIMIM के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
BJP के आरोपों का जवाब
BJP अक्सर TMC पर “मुस्लिम तुष्टिकरण” का आरोप लगाती रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हकीम ने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार हमेशा गरीब और पिछड़े वर्गों के विकास पर ध्यान देती है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
उन्होंने जंगलमहल और अमलासोल जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ये इलाके काफी पिछड़े थे और नक्सल समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन अब वहां विकास हुआ है।
चुनाव की तारीखें और आगे की रणनीति
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में सभी पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं।
कुल मिलाकर, AIMIM और हुमायूं कबीर के गठबंधन को लेकर बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। जहां एक ओर TMC इसे BJP की साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका वास्तविक असर वोटिंग पर कितना पड़ता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!