ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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महाराष्ट्र के बारामती में हुआ विमान हादसा अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इस हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई थी। अब इस मामले में बेंगलुरु में जीरो FIR दर्ज होने के बाद जांच ने नया रुख ले लिया है। यह FIR उनके भतीजे और एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। रोहित पवार ने अपनी शिकायत में इस हादसे को एक आपराधिक साजिश बताया है। उनके इन आरोपों के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
जीरो FIR क्यों दर्ज करनी पड़ी
रोहित पवार ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन, बारामती पुलिस और महाराष्ट्र CID से संपर्क किया था। लेकिन उनकी शिकायत कहीं भी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने 23 मार्च को बेंगलुरु जाकर जीरो FIR दर्ज कराई।
जीरो FIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी भी थाने में, चाहे घटना कहीं भी हुई हो, FIR दर्ज की जा सकती है। इसके बाद उस FIR को संबंधित क्षेत्र के थाने में भेज दिया जाता है। कर्नाटक पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद इसे महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांसफर कर दिया है। अब आगे की जांच महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की जाएगी।
रोहित पवार ने लगाए गंभीर आरोप
रोहित पवार ने अपनी शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विमान के उड़ान घंटों में गड़बड़ी थी। आधिकारिक रिकॉर्ड में विमान का रन टाइम 4,915 घंटे बताया गया है, जबकि उनका दावा है कि यह 8,000 घंटे से अधिक उड़ चुका था। उन्होंने यह भी कहा कि कम विजिबिलिटी के बावजूद विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ है। इसके अलावा, आखिरी समय पर क्रू में बदलाव किया गया और नए पायलट को शामिल किया गया।
रोहित पवार ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे से कुछ समय पहले पायलट के नाम पर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी। उन्होंने पायलट के पुराने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह पहले शराब से जुड़े मामलों में निलंबित रह चुके हैं।
VSR वेंचर्स कंपनी पर उठे सवाल
इस हादसे में शामिल विमान VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का था, जो दिल्ली स्थित एक प्राइवेट एयर ऑपरेटर कंपनी है। रोहित पवार ने कंपनी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 में नया विमान खरीदने का टेंडर रद्द कर दिया गया था। उनका मानना है कि अगर नया विमान खरीदा गया होता, तो यह हादसा टल सकता था। उन्होंने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
AAIB रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने इस हादसे पर 22 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया कि विमान कम विजिबिलिटी के बावजूद लैंडिंग करने की कोशिश कर रहा था।
CCTV फुटेज के आधार पर यह सामने आया कि विमान लैंडिंग के दौरान दाईं ओर मुड़ गया और पेड़ों से टकरा गया। इसके बाद वह जमीन से टकराया और उसमें आग लग गई। इस आग में पूरा कॉकपिट और केबिन जलकर खाक हो गया।
तकनीकी जांच में क्या सामने आया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हादसे से एक दिन पहले विमान की नियमित जांच की गई थी। उस समय किसी भी तरह की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई थी।
26 जनवरी को इस विमान ने मुंबई-सूरत-मुंबई रूट पर उड़ान भरी थी और 27 जनवरी की रात को मुंबई वापस आया था। इसके बाद 28 जनवरी की सुबह इसे बारामती के लिए उड़ान की अनुमति दी गई।
लैंडिंग के दौरान क्या हुआ
रिपोर्ट के अनुसार, बारामती एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी लगभग 3 किलोमीटर थी। इसके बावजूद विमान ने लैंडिंग की प्रक्रिया जारी रखी। पहले प्रयास में पायलट ने गो-अराउंड किया, लेकिन दूसरे प्रयास में रनवे दिखाई देने की पुष्टि करने के बाद लैंडिंग की अनुमति दी गई। इसी दौरान विमान संतुलन खो बैठा और हादसा हो गया।
रनवे की स्थिति भी बनी कारण
AAIB रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बारामती एयरपोर्ट के रनवे की स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं थी। रनवे की मार्किंग फीकी पड़ चुकी थी और उसकी सतह पर ढीली बजरी मौजूद थी। ये दोनों ही बातें लैंडिंग के दौरान जोखिम को बढ़ाने वाली थीं।
पायलट को मिला था पर्याप्त आराम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पायलट को उड़ान से पहले पर्याप्त आराम मिला था। मुख्य पायलट को 34 घंटे का आराम मिला था, जबकि सह-पायलट को 9 दिन से अधिक का विश्राम दिया गया था। इसके बावजूद हादसा होना कई सवाल खड़े करता है और जांच को और जरूरी बना देता है।
बारामती विमान हादसा अब केवल एक दुर्घटना का मामला नहीं रह गया है। रोहित पवार द्वारा लगाए गए साजिश के आरोपों ने इसे और गंभीर बना दिया है। जीरो FIR दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने यह चुनौती है कि वे सच्चाई का पता लगाएं। आने वाले समय में यह साफ हो सकेगा कि यह हादसा तकनीकी गलती का नतीजा था या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।
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