ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पश्चिम बंगाल में स्कूली बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील को लेकर नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या स्कूलों के भोजन मेनू से अंडों को हटाया जाएगा और उनकी जगह पूरी तरह शाकाहारी विकल्प दिए जाएंगे। इस विवाद में धार्मिक संस्था ISKCON (इस्कॉन), भाजपा सरकार और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। हालांकि अभी तक किसी भी तरह का अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि बच्चों पर शाकाहार थोपा जा रहा है, जबकि इस्कॉन ने कहा है कि मेनू को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत पश्चिम बंगाल सरकार के नए बजट से हुई। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने कहा कि मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने और वितरण में इस्कॉन की मदद ली जा सकती है। इसके बाद सोशल मीडिया पर खबरें फैलने लगीं कि जिन स्कूलों में भोजन की जिम्मेदारी इस्कॉन को दी जाएगी, वहां अंडों को मेनू से हटा दिया जाएगा। दावा किया गया कि अंडों की जगह पनीर, सोयाबीन, दाल और अन्य शाकाहारी प्रोटीन स्रोत शामिल किए जाएंगे। यहीं से विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया।
तृणमूल कांग्रेस ने उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। पार्टी नेता कुणाल घोष का कहना है कि अंडा बच्चों के पोषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह प्रोटीन से भरपूर होता है और बच्चों को पसंद भी आता है। उन्होंने कहा कि इस्कॉन एक सम्मानित संस्था है, लेकिन यदि भोजन पूरी तरह शाकाहारी बना दिया गया तो बच्चों के खान-पान में बड़ा बदलाव आएगा। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए ताकि बच्चों के पोषण पर कोई असर न पड़े।
डेरेक ओ'ब्रायन का भाजपा पर हमला
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में जबरन शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि मिड-डे मील का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देना है। यदि अंडों को हटाया जाता है तो इसका असर लाखों बच्चों के पोषण पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे बंगाल की खान-पान संस्कृति में हस्तक्षेप बताया।
ISKCON ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बाद ISKCON कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो मेनू वायरल हो रहा है, वह आधिकारिक नहीं है। उनके अनुसार अभी तक भोजन सूची को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। जब भी मेनू तय होगा, उसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील भी की।
मिड-डे मील योजना के नियम क्या कहते हैं?
केंद्र सरकार की पीएम पोषण (PM POSHAN) योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना के तहत राज्यों को यह अधिकार है कि वे स्थानीय जरूरतों और खान-पान की परंपराओं के अनुसार मेनू तैयार करें। हालांकि यह जरूरी है कि भोजन निर्धारित पोषण मानकों को पूरा करे। योजना में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर भी सख्त दिशानिर्देश बनाए गए हैं ताकि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिल सके।
फिलहाल मिड-डे मील से अंडे हटाने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। लेकिन इस मुद्दे ने पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। एक पक्ष इसे बच्चों के पोषण से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा इसे सांस्कृतिक और धार्मिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। अब सभी की नजर सरकार और इस्कॉन की ओर से आने वाले अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
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