ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मुफ्त बिजली के मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि अगर 2027 में उनकी सरकार बनती है तो प्रदेशवासियों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी। साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए सालाना 40 हजार रुपये की पेंशन देने का भी वादा किया है। अखिलेश यादव का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलचल बढ़ गई और सत्ता पक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
ओम प्रकाश राजभर का पलटवार
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के इस ऐलान पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष जनता को गुमराह करने और वोट हासिल करने के लिए झूठे वादे कर रहे हैं।
राजभर ने कहा कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब बिजली व्यवस्था बेहद खराब थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय सिर्फ कुछ चुनिंदा जिलों जैसे रामपुर, इटावा, मैनपुरी और सैफई में ही बेहतर बिजली आपूर्ति होती थी, जबकि बाकी प्रदेश में स्थिति बहुत खराब थी।
बिजली व्यवस्था पर आरोप-प्रत्यारोप
ओम प्रकाश राजभर ने आगे कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिलती थी और शहरों में भी स्थिति बेहतर नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय ट्रांसफार्मर जलने पर ग्रामीणों को खुद पैसे इकट्ठा करने पड़ते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि आज योगी आदित्यनाथ की सरकार में स्थिति काफी बेहतर हुई है और ट्रांसफार्मर अब 24 घंटे में बदल दिए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 15-16 घंटे और शहरों में 24 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
सियासी बयानबाजी तेज
राजभर ने अखिलेश यादव के वादे को “चुनावी छलावा” बताया और कहा कि यह जनता को भ्रमित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता पुराने कार्यकाल को भूलकर नए वादों के जरिए वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप और सरकार का बचाव
वहीं अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा था कि स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता का शोषण हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि 2027 में सत्ता में आने पर उनकी सरकार जनता को राहत देगी।
उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव से पहले बिजली को लेकर सियासी जंग तेज होती दिख रही है। एक तरफ समाजवादी पार्टी बड़े वादों के साथ जनता को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, वहीं सत्ता पक्ष इन वादों को अव्यावहारिक और चुनावी स्टंट बता रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और भी बड़ा रूप ले सकता है
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