ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर कई अहम मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने खासतौर पर बिजली व्यवस्था और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर सवाल उठाए हैं।
‘प्रीपेड पीड़ित’ का नया मुद्दा क्या है?
अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में सरकार की नीतियों के कारण ‘प्रीपेड पीड़ित’ नाम की एक नई समस्या पैदा हो गई है। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर और प्रीपेड बिजली व्यवस्था में कई खामियां हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ताओं की बिजली अचानक कट जा रही है, जबकि उन्होंने पहले ही भुगतान कर दिया होता है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हो जाते हैं।
बिजली कंपनियों पर भी लगाए आरोप
सपा प्रमुख ने बिजली कंपनियों और सरकार के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों को पहले ही पैसा मिल जाता है, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार में जनता ‘उपभोक्ता’ नहीं बल्कि ‘उपभुगता’ बन गई है, यानी उन्हें सिर्फ परेशानियां ही झेलनी पड़ रही हैं।
महिला आरक्षण पर उठाए गंभीर सवाल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बिना नई जनगणना के महिला आरक्षण लागू करना पूरी तरह भ्रामक है।उनका कहना है कि जब आधारभूत आंकड़े ही पुराने या गलत होंगे, तो आरक्षण का सही लाभ कैसे मिल पाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण पूरी तरह गणित पर आधारित है और इसके लिए सटीक डेटा होना जरूरी है।
‘गिनती गलत तो हक भी गलत’
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि अगर जनगणना के आंकड़े गलत होंगे, तो महिलाओं को मिलने वाला अधिकार भी गलत तय होगा। उन्होंने 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आरक्षण तय करने को अनुचित बताया। उनकी मांग है कि पहले नई जनगणना कराई जाए और उसके बाद ही महिला आरक्षण पर कोई ठोस फैसला लिया जाए।
सरकार पर लगाया ‘छलावा’ का आरोप
सपा अध्यक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं की सही गिनती नहीं करना चाहती और न ही उन्हें वास्तविक अधिकार देना चाहती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ किसी भी तरह का छलावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अखिलेश यादव के इन बयानों से साफ है कि आने वाले समय में यूपी की राजनीति में बिजली और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। ‘प्रीपेड पीड़ित’ जैसे नए शब्द के साथ उन्होंने सरकार को घेरने की कोशिश की है, जो आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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