पीएम मोदी के लिए अपशब्द, योगी और धर्मेंद्र प्रधान ने किया हमला

बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। हालांकि, इस यात्रा के दौरान दरभंगा जिले में उनके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिससे राजनीतिक वातावरण गरम हो गया। इस घटना पर सत्तापक्ष और भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

 मुख्यमंत्री योगी का बयान

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा किकांग्रेस और आरजेडी के मंच से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रयुक्त अभद्र भाषा राजनीतिक मर्यादा का पतन है। यह कृत्य सिर्फ प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं का अपमान है।सीएम योगी ने आगे कहा कि एक साधारण मां ने अपने संघर्षों और संस्कारों से ऐसे पुत्र को गढ़ा, जिसने खुद को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया और आज विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में जनता के दिलों में बसा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार की जनता इस घृणित राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी और भारतीय संस्कृति लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगी।

 धर्मेंद्र प्रधान ने साधा निशाना

 केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस मुद्दे पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा किप्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत माताजी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल शर्मनाक और निंदनीय है। यह भाषा राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सहित पूरेइंडीगठबंधन द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रति नफरत की पराकाष्ठा को दर्शाती है। राजद-कांग्रेस के चुनावी मंच से आई यह घृणित टिप्पणी बिहार और देशभर के हर उस भारतीय का अपमान है जो अपनी मां को भगवान के समान मानता है।

 भाजपा नेताओं का आरोप

 इस घटना ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया और बहस पैदा कर दी है। भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस और राजद की राजनीति में गिरावट और जनता के प्रति उनके असम्मान का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि इस तरह की अभद्रता लोकतांत्रिक मूल्य और भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।

 राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान इस तरह के विवादित बयानों से सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। विपक्ष पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह चुनावी लाभ के लिए भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है। इस तरह की घटनाएं केवल राजनीतिक हिंसा और अशांति को बढ़ावा देती हैं, जबकि जनता की असली जरूरत विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी नीतियों पर ध्यान देना है।

 साथ ही, यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ है। लोग घटना की निंदा कर रहे हैं और राजनीतिक नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग इस घटना को लोकतंत्र और राजनीतिक संस्कार के लिए खतरे के रूप में देख रहे हैं।

 लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना जरूरी

 इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट हो रहा है कि राजनीतिक असहमति और विवादों के बीच भी लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि आगामी समय में इस मामले को राजनीतिक बहस का मुख्य विषय बनाया जा सकता है। बिहार की जनता और देश के अन्य हिस्सों के लोग भी इस मामले को लेकर अपनी राय साझा कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।

 संपूर्ण रूप से देखा जाए तो, राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान हुई यह घटना राजनीतिक बहस और सत्तापक्ष-विपक्ष के टकराव को और तेज कर गई है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणियों ने इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। अब यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस और राजद इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और जनता किस पक्ष को उचित और न्यायसंगत मानती है।

 

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