ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बारामती (महाराष्ट्र) में 28 जनवरी 2026 को एक चार्टर्ड विमान क्रैश हो गया, जिसमें महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के साथ-साथ एयरहोस्टेस पिंकी माली और तीन अन्य लोगों की मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ राजनीतिक बल्कि एक आम परिवार के जीवन में गहरा दुख लेकर आया। पिंकी सिर्फ एक नाम नहीं थी — वह अपने परिवार के लिए गर्व की उड़ान थी, जिसकी कहानी आज हर किसी को भावुक कर रही है।
झोपड़पट्टी से विमान के कॉकपिट तक — पिंकी की जर्नी
पिंकी माली उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला के भैंसा गांव की रहने वाली थी, जहां उसके परिवार की पहचान एक साधारण घराने के रूप में थी। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद पिंकी ने ठाणे (महाराष्ट्र) से अपने सपनों को उड़ान देना शुरू किया।
वह मुंबई में परफेशनल ट्रेनिंग लेकर एविएशन इंडस्ट्री में एयरहोस्टेस के रूप में शामिल हुई। उसके पिता शिवकुमार माली ने बताया कि वह शुरुआत में अन्य चुनौतियों से जूझने के बाद अपने करियर में लगातार आगे बढ़ती गईं।
पिंकी की पेशेवर जिंदगी और जिम्मेदारी
पिंकी ने लगभग पांच से आठ साल तक प्राइवेट चार्टर्ड फ्लाइट्स में काम किया। वह खासतौर पर वीआईपी और बड़ी उड़ानों पर ड्यूटी करने वाली क्रू मेंबर थी। उसे सम्मान भी मिला था और उसने देश के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उड़ान भरी थी। उसकी यह हिम्मत और लगन परिवार और सहकर्मियों के लिए गर्व का विषय रही।
पिंकी का यह पेशा सिर्फ नौकरी नहीं था — यह उसकी मेहनत, आत्मनिर्भरता, और सपनों की उड़ान थी। परिवार और गांव वाले भी उसकी सफलता को अपनी जीत मानते थे।
अंतिम बातचीत — “पापा, मैं उड़ने जा रही हूँ”
हादसे से एक दिन पहले पिंकी ने अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी, जिसमें उसने बताया था कि वह अजित दादा के साथ बारामती जा रही है और वहां पहुंचकर वह नांदेड़ के लिए आगे उड़ान भरने वाली है। यह उसकी अंतिम बातचीत बन गई, जिसने उसके परिवार को भावनात्मक रूप से बहुत ही गहरा ठेस पहुँचाई।
इस बातचीत में उसकी आवाज शांत, सकारात्मक और सामान्य थी — बिल्कुल उसी तरह जैसे एक प्रोफेशनल लड़की की होती है जिसे अपने काम पर भरोसा हो। इस कॉल ने अभी भी उसके पिता के दिल में वह दर्द बना रखा है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
पिंकी का परिवार और गांव की प्रतिक्रिया
पिंकी के पिता कहते हैं, “हम झोपड़पट्टी वालों के लिए पिंकी पर गर्व की बात थी। उसकी मेहनत ने हमें हर किसी की नजरों में उठाया।” आशा, सम्मान और सम्मान की भावना उसके परिवार के लिए हमेशा गर्व की बात थी।
उसका गांव भैंसा आज भी उसके नाम से याद किया जा रहा है। हर कोई उसके उज्जवल भविष्य की बातें याद कर रहा है और यह सोच रहा है कि कैसे एक साधारण लड़की ने अपने जीवन में इतने बड़े मुकाम तक पहुँचना संभव किया।
पिंकी की दादी और भाई-बहन भी अपने बीच उसकी कमी को महसूस कर रहे हैं। दादी उसकी यादों में फफक-फफक कर रो रही हैं और गांव वाले उसके उत्साह, मिलनसार स्वभाव और त्योहारों में उसकी भागीदारी को याद कर रहे हैं।
दुर्घटना की वजह और जांच जारी
बारामती में लैंडिंग के समय रनवे पर नियंत्रण खो जाने से विमान रनवे से पहले ही गिर गया और जोरदार धमाके के साथ आग फैल गई। इस घटना में कप्तान सुमित कपूर, को-पायलट सांभवी पाठक, पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदीप जाधव समेत पिंकी माली और अजित पवार की भी मौत हो गई।
घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) द्वारा जारी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार विजिबिलिटी और रनवे-संबंधी चुनौतियां इस हादसे की वजह हो सकती हैं, हालांकि फाइनल रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
शोक, संतप्त परिवार और यादें
पिंकी माली सिर्फ एक एयरहोस्टेस नहीं थी — वह एक बेटी, बहन और परिवार की उम्मीद थी। उसके चाहने वाले उन पलों को याद कर रहे हैं जब वह घर आती थी, अपने काम की बात करती थी और अपने सपनों को साकार करने में जुटी रहती थी।
अब वह दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मेहनत, उसके शब्द और उसकी यात्रा हमेशा याद रखी जाएगी। उसकी कहानी उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीने का साहस रखते हैं।
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