ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
मथुरा के पास यमुना/दिल्ली-आगरा एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे में कई बसों और कारों की टक्कर के बाद आग लग गई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की खबर है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि आवाज “बम फटने” जैसी लगी और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
हादसा
कब और कहां हुआ
यह भीषण हादसा यूपी के मथुरा इलाके में
एक्सप्रेसवे पर तड़के करीब 4:30
बजे के आसपास हुआ बताया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज लपटें
दिखीं और फिर एक के बाद एक धमाकों जैसी आवाजें आने लगीं, जिससे आसपास के गांवों तक लोग घबरा गए।
जब गांव के लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे, तो कई बसें और कारें आग की चपेट में थीं और एक्सप्रेसवे पर अफरा-तफरी
का माहौल था।
टक्कर के बाद आग कैसे फैली
रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में छह स्लीपर वोल्वो
बसें, एक रोडवेज बस और
तीन कारें आग की चपेट में आकर जलती दिखीं। आग इतनी तेज बताई गई कि दूर से काले
धुएं का गुबार और लपटें नजर आ रही थीं। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बसों से
उतरने की कोशिश की, कई
यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े और बाहर कूदकर खुद को बचाया।
चश्मदीदों ने क्या बताया
मौके पर मौजूद भगवान दास ने कहा कि गाड़ियां
आपस में टकराईं तो उन्हें ऐसा लगा जैसे बम फटा हो और तेज धमाका हुआ हो, फिर पूरा गांव आनन-फानन में मौके पर
पहुंचा। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि हादसे के बाद आग का गुबार दिखा और लोग बसों
की खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलते रहे, चारों तरफ चीख-पुकार थी। प्रत्यक्षदर्शी सुनील कुमार यादव ने बताया
कि वह जौनपुर से लौटकर दिल्ली जा रहे थे, तभी तेज आवाज आई और अंधेरा/कोहरा इतना घना था कि कुछ दिखाई नहीं दे
रहा था; बाहर निकलते ही
पीछे से एक के बाद एक बसें टकराने लगीं।
प्रशासन की कार्रवाई और नुकसान
आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की
गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का काम शुरू हुआ। एसएसपी श्लोक कुमार
के मुताबिक घना कोहरा इस हादसे की बड़ी वजह बना और टक्कर के बाद बसों में आग लग गई; उन्होंने बताया कि 7 बसें और 3 अन्य गाड़ियां आपस में भिड़ीं।
रिपोर्ट के अनुसार कई बसें पूरी तरह जल चुकी थीं और उन्हें क्रेन की मदद से सड़क
से हटाया जा रहा था, जबकि
राहत-बचाव काम अंतिम चरण में पहुंचने की बात कही गई।
कोहरे
में सफर: डर भी, जिम्मेदारी
भी
ऐसे हादसे याद दिलाते हैं कि कोहरे में तेज
रफ्तार सबसे बड़ा खतरा बन जाती है—क्योंकि सामने वाला वाहन, ब्रेक लाइट या मोड़ समय पर दिखता ही
नहीं। कोहरे में कई बार ड्राइवर को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि आगे ट्रैफिक धीमा है
या कहीं अचानक जाम जैसा हाल बन गया है, और बस एक छोटी सी चूक बड़ी टक्कर में बदल जाती है। इस तरह की घटनाओं
में सबसे ज्यादा नुकसान यात्रियों और उनके परिवारों को होता है, क्योंकि कुछ मिनटों में खुशियों वाला
सफर अस्पताल और मातम में बदल जाता है।
ऐसे
समय में क्या सावधानी रखें
खबरों में बार-बार दिख रहा है कि कोहरे के मौसम
में सफर करते समय छोटी-छोटी सावधानियां भी बहुत काम आती हैं। अगर विजिबिलिटी कम हो, तो स्पीड कम रखना, सेफ डिस्टेंस बनाए रखना और ओवरटेक से
बचना सबसे जरूरी है। लंबी दूरी की बसों और कारों में सफर करने वाले लोग भी सीट
बेल्ट (जहां उपलब्ध हो) और इमरजेंसी एग्जिट जैसी बेसिक बातों पर ध्यान रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर बाहर निकलने में
समय न लगे। सबसे अहम बात यह है कि ड्राइवर पर “जल्दी पहुंचने” का दबाव न बनाया
जाए—क्योंकि देर से पहुंचना बुरा है, लेकिन सुरक्षित पहुंचना सबसे जरूरी है।
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