ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
24 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश के संभल में एक सामान्य‑सी स्थिति अचानक भयंकर हिंसा में बदल गई थी। शाही जामा मस्जिद के सर्वे के समय तनाव तब बढ़ा जब दोनों पक्षों के बीच विवाद और बढ़ गया। इस हिंसा में चार युवकों की मौत हुई थी और कई पुलिसकर्मियों समेत दर्जनों लोग घायल भी हुए थे। बाद में पुलिस ने जो जांच की वह साधारण विवाद नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का संकेत देती है।
इस पूरी घटना के पीछे पुलिस ने शुरुआती जांच में एक नाम प्रमुख रूप से सामने रखा — शारिक साठा। जितना यह मामला पहले स्थानीय झड़प जैसा दिखा, आगे की जांच से पता चला कि यह केवल एक हिंसा नहीं थी, बल्कि माहौल भड़काने की एक सुनियोजित कोशिश थी।
शारिक साठा: गैंगस्टर से मास्टरमाइंड तक
शारिक साठा एक कुख्यात अपराधी है, जिसे पुलिस सिर्फ साधारण बदमाश नहीं मान रही है, बल्कि संभल हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसके खिलाफ 69 से अधिक मामले पहले से दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हथियार सप्लाई, वाहन चोरी और हिंसा भड़काने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उसे गैंगस्टर, अंतरराष्ट्रीय ऑटो लिफ्टर और हिंसा के पीछे की साजिश का मुख्य भागीदार माना जाता है।
साठा न केवल भारत में विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बंगाल व दार्जिलिंग में आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है, बल्कि वह 2020 में जाली पासपोर्ट के ज़रिये दुबई भाग गया था, ताकि वह भारत पुलिस की गिरफ्त से बच सके।
दुबई से चल रहा नेटवर्क और रणनीति
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि साठा दुबई में बैठा हुआ था और अपने गुर्गों के ज़रिये भारत में हिंसा की साजिश रच रहा था। वह अपने नेटवर्क को चलाने के लिए खास मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करता था और हथियार, गोलियाँ तथा अन्य उपकरण सप्लाई करवाता था।
यह भी सामने आया कि उसके गुर्गों ने स्थानीय युवाओं को हथियार देकर गोलीबारी के लिए उकसाया और चार व्यक्तियों की हत्या का जिम्मा इसी नेटवर्क को बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, मुल्ला अफरोज और मोहम्मद वारिस जैसे आरोपियों ने साठा के निर्देश पर ही यह हिंसा बढ़ाई।
पाकिस्तानी कनेक्शन और विदेशी कारतूस
संभल हिंसा के दौरान पुलिस को पाकिस्तानी निर्मित 9MM के कारतूस भी मिले थे, जो यह संकेत देते हैं कि यह एक साधारण स्थानीय विवाद नहीं था, बल्कि कहीं न कहीं अंतरराष्ट्रीय हाथ भी इस मामले में दिख रहे हैं। पुलिस ने कहा था कि पाकिस्तान की कुछ संस्थाएँ और संदिग्ध समूह इस हिंसा से जुड़े हो सकते हैं, जो इस मामले को और गंभीर रूप देते हैं।
इस तरह के विदेशी कारतूसों की बरामदी से यह भी संकेत मिलता है कि हथियार सप्लाई का नेटवर्क सीमाओं के बाहर से संचालित हो रहा है, जिसमें पाकिस्तानी और अफगानिस्तान के तत्वों का भी नाम जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
दाऊद इब्राहिम और ISIS‑ISI लिंक का शक
पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने यह भी कहा है कि साठा का संबंध सिर्फ स्थानीय गैंगस्टर तहजीब से नहीं है, बल्कि उसके कनेक्शन दाऊद इब्राहिम जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से भी हो सकते हैं। इस बात का ज़िक्र खुफिया इनपुट में भी आया है, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।
कुछ खुफिया रिपोर्टों में कहा गया है कि दुबई में बैठा साठा दाऊद के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है और पाकिस्तान के आईएसआई एजेंटों के इशारे पर भारत में अपराध और अशांति फैलाने की कोशिश में लगा हुआ है।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में काफी गंभीर कदम उठाए हैं। पहले तो शारिक साठा के तीन प्रमुख गुर्गों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इसके अलावा कोर्ट ने साठा के घर की कुर्की के आदेश जारी किए हैं। पुलिस अब उसके खिलाफ सारी संपत्तियाँ जब्त करने जा रही है और यह कार्रवाई 21 जनवरी को शुरू हो चुकी है।
कोर्ट की अवहेलना करने पर उसके खिलाफ नए मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं, क्योंकि साठा कई बार खुद पेश नहीं हुआ और न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की। कुर्की की तैयारी पुलिस ने पूरी कर ली है और इसे साठा गैंग की कमर तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय जाल और पुलिस की चुनौतियाँ
शारिक साठा का नेटवर्क इतना बड़ा और जटिल है कि पुलिस को उसकी विदेश में मौजूदगी, पाकिस्तान और डी गैंग कनेक्शन का पता लगा है। ऐसे नेटवर्क पर लगाम कसने में खुफिया एजेंसियों को भी चुनौती मिल रही है। यह मामला स्थानीय हिंसा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है, जिससे सिर्फ स्थानीय प्रशासन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ भी जुड़ गयी हैं।
पुलिस का मानना है कि हथियारों और विदेशी कारतूसों की सप्लाई, धन के संदिग्ध ट्रांसफर और विदेशी लिंक यह दर्शाते हैं कि साठा का नेटवर्क भारत के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर सकता है।
स्थानीय किरदार और गिरफ्तारियां
शारिक साठा के अलावा पुलिस ने उसके कई स्थानीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुल्ला अफरोज और मोहम्मद गुलाम जैसे लोग शामिल हैं। पूछताछ में इन आरोपियों ने बताया कि साठा ने ही हिंसा भड़काने का निर्देश दिया था और स्थानीय लोगों को हथियार देकर माहौल बिगाड़ा गया था।
एक अन्य साक्ष्य के अनुसार, साठा ने दिल्ली से एक वकील की हत्या की साजिश भी रची थी ताकि इलाके में भय का माहौल बनाया जा सके और पुलिस की कार्यवाही रोकी जा सके।
भविष्य की राह: संघर्ष या समाधान?
अब पुलिस इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के तहत साठा को लाने की तैयारी कर रही है ताकि उसे भारत लाकर अदालत का सामना कराया जा सके। साथ ही इस गैंग के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया एजेंसियाँ भी सक्रिय हैं। यह एक लंबी लड़ाई है, जहाँ सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक होगा।
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