ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश उपचुनाव के नतीजों के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश ने कहा कि उपचुनाव के दौरान धांधली और “वोटों की चोरी” हुई है। उनका दावा है कि नतीजों को प्रभावित करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर प्रशासन ने काम किया और मतगणना में गड़बड़ी की गई।
अखिलेश यादव का ट्वीट
अखिलेश यादव ने एक्स (ट्विटर) पर एक तीखा ट्वीट करते हुए लिखा—
“उप्र में 2022 के विधानसभा चुनावों में नाम काटने को लेकर हमने जो 18000 शपथपत्र दिये थे, भाजपा सरकार उनमें से एक का भी जवाब सही तरीक़े से देना नहीं चाहती है। ज़िलाधिकारी को आगे करके चुनाव आयोग बच नहीं सकता। इस मामले की गहन जाँच-पड़ताल हो। डीएम साहब दिखाएं कि नाम काटते समय जो ‘मृतक प्रमाणपत्र’ लगाए गये थे वो कहाँ हैं। अगर ये झूठ नहीं है तो ये सफ़ाई देने में इतने साल क्यों लग गये?”
अब उनके इस बयान ने यूपी की सियासत में नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। अखिलेश ने साफ कहा कि जब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता।
https://x.com/yadavakhilesh/status/1957838198761279832
डीएम का पलटवार
हालांकि अब अखिलेश के आरोपों पर संबंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मतगणना पूरी तरह पारदर्शी माहौल में हुई है। उन्होंने कहा—“गिनती के दौरान सभी पार्टियों के प्रत्याशी और एजेंट मौजूद थे। हर राउंड के बाद परिणामों की जानकारी सार्वजनिक की गई। किसी को भी बाहर नहीं किया गया।”
डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया गया और पूरी प्रक्रिया वीडियोग्राफी के तहत हुई। उन्होंने कहा कि हार-जीत चुनाव का हिस्सा है, लेकिन बेबुनियाद आरोप लगाना सही नहीं है।
चुनाव आयोग की भूमिका
डीएम ने बताया कि आयोग ने उपचुनाव के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता पर खास ध्यान दिया। सभी स्ट्रॉन्ग रूम सीसीटीवी कैमरों से निगरानी में थे। साथ ही, मतगणना केंद्र पर धारा 144 लागू थी ताकि कोई भी उपद्रव न हो सके। उन्होंने कहा कि अगर किसी को शिकायत है तो उसके लिए कानूनी रास्ते खुले हैं।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
वहीं, बीजेपी नेताओं ने अखिलेश के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सपा जनता का जनादेश स्वीकार करने की बजाय झूठे आरोप लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी ने तंज कसा कि हार की बौखलाहट में अखिलेश चुनाव आयोग और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
सियासत में बढ़ी तल्खी
इस बयान के बाद सियासत और भी गरमा गई है। सपा कार्यकर्ता अब भी मानने को तैयार नहीं हैं कि गिनती निष्पक्ष हुई। वहीं बीजेपी का कहना है कि सपा हार की बौखलाहट में आरोप लगा रही है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि जनता ने सपा को नकार दिया, लेकिन अखिलेश इसे स्वीकार करने की बजाय चुनाव आयोग और प्रशासन पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
उपचुनाव का राजनीतिक असर
उपचुनाव भले ही सीमित सीटों पर हुआ हो, लेकिन इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव तक दिखाई दे सकता है। सपा ने इसे लोकतंत्र की असल लड़ाई बताया है, वहीं बीजेपी इसे जनता का विश्वास बता रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर “वोटों की चोरी” के आरोपों की गूंज और बढ़ी, तो यह चुनाव आयोग की साख पर भी सवाल खड़े कर सकता है। अगर जनता का भरोसा चुनावी प्रक्रिया से उठता है, तो यह लोकतंत्र के लिए वाकई बड़ी चुनौती होगी।
बहरहाल, अखिलेश यादव का आरोप और डीएम का जवाब, दोनों ने मिलकर यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन खुद को पूरी तरह पारदर्शी बता रहा है। असली सच्चाई क्या है, यह तो जांच और समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराएगा।
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