ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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यूपी में कोडीन कफ सिरप केस फिर चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में
आ गया है। वजह यह है कि यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की। मीडिया से बातचीत में
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की है और NDPS के तहत कदम उठाए गए
हैं।
सीएम योगी का बयान आते ही मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं
रहा, बल्कि
इसमें राजनीति भी तेज हो गई। उन्होंने सीधे तौर पर यह दावा किया कि “हर माफिया के
संबंध समाजवादी पार्टी (सपा) से पाए जाते हैं।” इस बयान के बाद विपक्ष और सरकार के
बीच बहस और तेज होने की संभावना भी बढ़ गई है।
सीएम योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोडीन कफ सिरप केस में सरकार की
तरफ से कार्रवाई की गई है और पुलिस ने NDPS के तहत कार्रवाई की है, जिसमें “व्यापक
गिरफ्तारियां” हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों को STF ने पकड़ा है,
उनके संबंध सपा से
सामने आए हैं और आगे भी ऐसे रिश्ते निकलेंगे।
सीएम योगी ने यह भी कहा कि जांच के बाद “दूध का दूध और पानी का पानी
हो जाएगा।” यानी सरकार का संकेत है कि जांच पूरी होने के बाद वह पूरे मामले की
परतें खोलने का दावा कर रही है। उन्होंने यहां तक कहा कि अभियुक्तों की नजदीकियां
सपा प्रमुख से भी सामने आई हैं और पैसों के लेनदेन की बात भी कही।
यह पूरा बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ने पहली
बार इस केस में राजनीतिक कनेक्शन की बात खुले तौर पर कही है।
विधानसभा सत्र का संदर्भ: आज कार्यवाही क्यों नहीं?
सीएम योगी ने विधानसभा सत्र के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा
कि यूपी विधानसभा का शीतकालीन सत्र 24 दिसंबर तक चलेगा और इस दौरान माननीय सदस्य जनता
के मुद्दे उठाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि “आज विधानसभा में कार्यवाही नहीं होगी” और
इसकी वजह उन्होंने “कोंडोलेंस” (शोक/श्रद्धांजलि) बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि
यदि विधान परिषद में यह मुद्दा उठता है, तो वह जवाब देंगे।
कोडीन क्या है और विवाद क्यों?
मुख्यमंत्री के बयान में एक अहम बात यह भी थी कि कोडीन NDPS
के अंतर्गत आने वाली
औषधि है। उन्होंने कहा कि इसका उपयोग गंभीर खांसी में होता है और इसका कोटा/आवंटन सेंट्रल नारकोटिक्स तय करता है।
लेकिन जब किसी दवा के “नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल” की शिकायतें
आने लगती हैं, तो मामला गंभीर हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, नशीले इस्तेमाल की
शिकायत हुई है और FSDA ने इसे NDPS के दायरे में लाया है।
यानी सरकार का फोकस यह बताने पर है कि दवा का एक वैध मेडिकल उपयोग हो
सकता है, लेकिन
अगर इसे अवैध तरीके से नशे के लिए इस्तेमाल या तस्करी किया जा रहा है, तो कानून के तहत
सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किन एजेंसियों की कार्रवाई का जिक्र हुआ?
सीएम योगी ने बताया कि इस मामले में अलग-अलग एजेंसियां कार्रवाई कर
रही हैं। उन्होंने FSD/FSDA, यूपी पुलिस और STF की कार्रवाई का जिक्र किया। साथ ही
उन्होंने कहा कि अवैध तस्करी पकड़ी गई है और इसमें बड़ी गिरफ्तारियां हुई हैं।
यह हिस्सा इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ
एक थाने या एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े नेटवर्क की तरह देखा जा रहा
है—जहां सप्लाई, स्टोरेज, बिक्री और तस्करी जैसी चीजें जांच के दायरे में आ सकती हैं।
सपा पर आरोप: राजनीति क्यों गरमा सकती है?
सीएम योगी के बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि उन्होंने
सीधे-सीधे कहा कि हर माफिया के संबंध सपा से पाए जाते हैं।
जब किसी आपराधिक/NDPS से जुड़े केस में किसी राजनीतिक दल का नाम आता है,
तो बहस आमतौर पर दो
दिशाओं में जाती है—
पहली: सरकार कहती है
कि नेटवर्क के पीछे राजनीतिक संरक्षण है।
दूसरी: विपक्ष इसे
राजनीतिक बदले की कार्रवाई या बयानबाजी बता सकता है।
फिलहाल इस खबर में मुख्य बात यही है कि मुख्यमंत्री ने जांच पूरी होने
के बाद “सपा की संलिप्तता” सामने आने का दावा किया है।
आगे क्या देखने वाली बातें हैं?
अब इस केस में कुछ सवाल सबसे अहम हो जाते हैं:
सीएम योगी ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और अपडेट्स, गिरफ्तारियां या खुलासे सामने आ सकते हैं।
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