ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ब्राह्मण विधायकों की एक अहम बैठक के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह बैठक 22 दिसंबर को कुशीनगर से आए विधायक पंचानंद पाठक के लखनऊ आवास पर हुई, जिसे उनकी पत्नी के जन्मदिन और सह-भोज के रूप में बताया गया। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में भी देख रहे हैं।
बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
ब्राह्मण वोटबैंक और राजनीतिक आंकड़े
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाता लगभग 8 से 10 फीसदी माने जाते हैं। प्रदेश की 110 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां ब्राह्मण मतदाताओं का असर निर्णायक माना जाता है। करीब 12 जिले ऐसे हैं, जहां ब्राह्मण आबादी 15% से अधिक है। इनमें बलरामपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, अमेठी, वाराणसी, चंदौली, कानपुर और प्रयागराज प्रमुख हैं।
CSDS लोकनीति के आंकड़ों के अनुसार, 2022 विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों का 89% वोट भाजपा को मिला, जबकि समाजवादी पार्टी को मात्र 6% और कांग्रेस को 1% समर्थन मिला। 2017 में भी भाजपा को 83% ब्राह्मण वोट मिले थे। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि ब्राह्मण वोट भाजपा के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
बैठक के मायने और सियासी संकेत
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैठक कई मायने रखती है। हाल के सियासी परिदृश्य और जातीय राजनीति में ब्राह्मणों की आवाज कम होती जा रही है, और इसी कारण उनके मुद्दों को उठाने के लिए यह बैठक आयोजित हुई। हालांकि बैठक में शामिल विधायकों का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी नाराजगी को जाहिर करना नहीं था, बल्कि पश्चिमी सभ्यता, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा करना था।
फिर भी राजनीतिक हलकों में इसे आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है। भाजपा ने हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कुर्मी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी को जिम्मेदारी सौंपी है। इससे ब्राह्मण समुदाय में अपनी राजनीतिक ताकत और वोटबैंक को लेकर असंतोष और चिंतन की स्थिति बनी है। बैठक को इस नजरिए से देखा जा रहा है कि भाजपा के लिए ब्राह्मण वोटबैंक का प्रभाव, उसकी ताकत और भविष्य की रणनीति को समझने की कोशिश की गई।
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