ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन मामले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल आरोपी और यूथ कांग्रेस नेता कृष्ण हरि की गाड़ी बरामद कर ली है। इस गाड़ी से टी-शर्ट और पोस्टर भी मिले हैं, जो प्रदर्शन से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस ने एक और प्रदर्शनकारी को हिरासत में लिया है और बाकी लोगों की तलाश में छापेमारी जारी है।
पुलिस की जांच में नए सुराग
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से चल रही है। गाड़ी की बरामदगी से पुलिस को प्रदर्शन से जुड़े अहम सबूत मिलने की उम्मीद है। टी-शर्ट और पोस्टर जैसे सामान से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शन की योजना किसने बनाई और इसके पीछे कोई संगठित साजिश तो नहीं थी।
पुलिस अब प्रदर्शन में शामिल बाकी लोगों की पहचान करने में जुटी है। सोशल मीडिया फुटेज और सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपियों को ट्रेस किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेजा
इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने पहले गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। ये आरोपी उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों के बताए जा रहे हैं। कोर्ट ने शुरुआती जांच में बाहरी साजिश के संकेत मिलने पर चिंता जताई है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि यह प्रदर्शन सामान्य विरोध नहीं था, बल्कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हुआ। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की आशंका भी जताई गई। कोर्ट का मानना है कि किसी भी प्रदर्शन को कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था?
यह घटना 20 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे हुई। भारत मंडपम के एग्जिबिशन हॉल में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अचानक नारेबाजी शुरू कर दी। उनके टी-शर्ट पर प्रधानमंत्री और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर स्लोगन लिखे थे।
प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट उतारकर नारे लगाए, जिससे वहां मौजूद अंतरराष्ट्रीय डेलिगेशन और मेहमानों के बीच अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला और उन्हें तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और बहस
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तापक्ष का कहना है कि समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इस तरह का प्रदर्शन अनुचित था, क्योंकि इससे देश की छवि पर असर पड़ सकता था। वहीं विपक्ष का तर्क है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन उसे नियमों के भीतर रहकर करना चाहिए।
कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा कि विरोध का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं।
आगे की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस अब मामले की गहराई से जांच कर रही है। बाकी प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर विरोध के तरीके को लेकर भी बहस खड़ा कर रहा है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे जिम्मेदारी और संयम के साथ इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
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