ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में नवंबर 2025 में हुए लाल किला बम धमाके के मामले में एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस के आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश की याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच एजेंसी NIA को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को तय की है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 10 नवंबर 2025 की रात का है, जब दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास एक कार में जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। जांच में सामने आया कि कार में मौजूद एक व्यक्ति ने आत्मघाती हमले के रूप में इस विस्फोट को अंजाम दिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया और मामले की गहन जांच शुरू की।
आरोपी ने क्यों दी हाई कोर्ट में याचिका
मुख्य आरोपी जसीर बिलाल वानी ने फरवरी 2026 में स्पेशल NIA कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसने अदालत द्वारा जांच एजेंसी को दिए गए अतिरिक्त समय और अपनी जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को गलत बताया है। दरअसल, NIA तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी। इसी आधार पर आरोपी ने कोर्ट से राहत की मांग की है।
जांच के लिए बढ़ाया गया था समय
इस मामले में NIA ने अदालत से जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। एजेंसी का कहना था कि मामले में शामिल आरोपियों के वित्तीय और डिजिटल नेटवर्क की गहराई से जांच जरूरी है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जांच की समय सीमा को 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया था। इसी फैसले को अब हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
अन्य आरोपी और उनकी स्थिति
इस केस में जसीर के अलावा कई अन्य लोग भी आरोपी हैं, जिनमें आमिर राशिद मीर, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, डॉ. मुजमिल शकील गनी, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद और शोएब शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। सुनवाई के दौरान कुछ आरोपी कोर्ट में पेश हुए, जबकि अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
आगे क्या होगा
अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी, जहां दिल्ली हाई कोर्ट NIA के जवाब पर विचार करेगा। यह देखना अहम होगा कि कोर्ट जांच एजेंसी के पक्ष को स्वीकार करता है या आरोपी को राहत मिलती है।
लाल किला ब्लास्ट केस देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में जांच की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया का सही पालन बेहद जरूरी होता है। दिल्ली हाई कोर्ट का यह नोटिस इस केस में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, जिससे आगे की दिशा तय होगी।
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